
GST On Packaged Food Items: आटा मीलों, चावल मीलों तथा दाल मीलों को बड़ी राहत
GST On Packaged Food Items: जीएसटी काउंसिल ने आटा, दाल, चावल, गेहूं, गुड़ आदि पर जीएसटी लगाने की अनुशंषा की। 13 जुलाई को केन्द्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर उपरोक्त सभी वस्तुओं पर जीएसटी संधारित कर दिया। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल द्वारा 16 जुलाई को 7300 मण्डियां, 13 हजार दाल मीलें, 9600 चावल मीलें, 8 हजार आटा मीलें, 30 हजार आटा चक्कियां बंद रखकर विरोध जताया।
भारत सरकार ने 17 जूलाई को आदेश जारी कर 25 किलोग्राम से ऊपर की भरती को छूट देकर मुक्त कर दिया। यानि एक किलोग्राम से लेकर 25 किलोग्राम तक प्री-पैकेज्ड एवं प्री-लेबल्ड होने पर जीएसटी लगेगा। परन्तु 25 किलोग्राम से ऊपर भरती पर आटा, गेहूं, दाल, चावल पर जीएसटी नहीं लगेगा। इससे देश की मण्डियों में होने वाला व्यापार कर मुक्त की श्रेणी में आ गया है। इसी प्रकार दाल मिल, चावल मिल तथा आटा मिल का उत्पाद भी 25 किलोग्राम से ऊपर की भरती होने पर शून्य जीएसटी की श्रेणी में आ गया। बीयूवीएम के राष्ट्रीय चेयरमेन बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि केन्द्र सरकार के इस छूट के कारण मण्डियों, आटा मीलों, चावल मीलों तथा दाल मीलों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी और बड़ी कम्पनियों के 1 किलोग्राम से 25 किलोग्राम तक के पैक में आटा, दाल, चावल खाने वाले कुछ व्यक्तियों को ही यह कर देना पड़ेगा। इस कर छूट का लाभ देश की 55 प्रतिशत जनसंख्या को मिलेगा।
खाद्य पदार्थ की सभी वस्तुएं जीएसटी मुक्त हो
गुप्ता ने प्रधानमंत्री एवं वित्तमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा, इससे छोटे व्यापारियों एवं छोटे उद्योगों पर जो जीएसटी की मार पड़ने वाली थी, उससे मुक्ति मिलेगी। गुप्ता ने मांग की है कि खाद्य पदार्थ की सभी वस्तुओं को चाहे वह आटा, मैदा, चावल, दाल हो या तेल हो या मसाले हो सभी को कर मुक्त किया जाना चाहिए। जीएसटी काउंसिल ने ग्रेडिंग, क्लिनिंग, शोर्टिंग तथा मिलिंग मशीनों पर जो अनाज तथा दलहन में काम आती है तथा पवन चक्कियां आदि पर 5 प्रतिशत से 18 प्रतिशत जीएसटी कर दिया है। अनाज के स्टोरेज को भी जीएसटी के दायरे में लाया गया है। इन्हें तुरन्त प्रभाव से छूट दी जानी चाहिए। खाद्य पदार्थ पर किसी भी प्रकार का जीएसटी संधारण ठीक नहीं है। खाद्य तेल को तेल की पैकिंग का रिफण्ड बंद किया गया है। उसे जारी रखा जाना चाहिये।
छोटे होटलों में हो रही थी जीएसटी चोरी
अब तक होटल वाले 1000 रुपए से अधिक किराये वाले कमरे की बुकिंग का किराया भी 1000 रुपए से कम दिखाते थे। इससे उनका जीएसटी बच जाता था। क्योंकि 1000 रुपए से अधिक किराए वाले कमरे पर पहले से 12 प्रतिशत जीएसटी है। हालांकि इसका कोई फायदा ग्राहकों को नहीं मिलता था और सरकार को टैक्स का भी घाटा हो रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति निजी अस्पताल में इलाज के लिए 5000 रुपए प्रतिदिन किराए वाला कमरा ले सकता है तो उसे अब 5000 की 5250 रुपए देने में कोई खास दिक्कत नहीं होगी। सोमवार से निजी अस्पताल में 5000 रुपए से अधिक किराये वाले वाले कमरे पर भी पांच प्रतिशत जीएसटी देना होगा।
Published on:
19 Jul 2022 09:15 am
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