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जन्मतिथि: पिंगलि वेंकैय्या

पिंगली वेंकैय्या का जन्म 2 अगस्त 1878 को हुआ था। वे भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगा' के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थे।

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पिंगली वेंकैय्या का जन्म 2 अगस्त 1878 को हुआ था। वे भारत के राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगा’ के अभिकल्पक थे। वे भारत के सच्चे देशभक्त, महान् स्वतंत्रता सेनानी एवं कृषि वैज्ञानिक भी थे। भारत के राष्‍ट्रीय ध्वज की रूपरेखा तैयार करने वाले पिंगली वेंकैय्या का जन्म आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले के “दीवी” तहसील के “भटाला पेनमरू” नामक गांव में 2 अगस्त, 1878 को हुआ था। पिंगली वेंकैय्या ने प्रारंभिक शिक्षा भटाला पेनमरू और मछलीपट्टनम से प्राप्त करने के बाद 19 वर्ष की उम्र में मुंबई चले गए। वहां जाने के बाद उन्‍होंने सेना में नौकरी कर ली, जहां से उन्हें दक्षिण अफ्रीका भेज दिया गया। सन 1899 से 1902 के बीच दक्षिण अफ्रीका के “बायर” युद्ध में उन्होंने भाग लिया। इसी बीच वहां पर वेंकैय्या की मुलाकात महात्मा गांधी से हो गई, वे उनके विचारों से काफ़ी प्रभावित हुए, स्वदेश वापस लौटने पर मुंबई में रेलवे में गार्ड की नौकरी में लग गए। इसी बीच मद्रास में प्लेग नामक महामारी फैल गई और उन्‍होंने वह नौकरी भी छोड़ दी। वहां से मद्रास में प्लेग रोग निर्मूलन इंस्‍पेक्‍टर के पद पर तैनात हो गए। पिंगलि वेंकैय्या की संस्कृत, उर्दू एवं हिंदी आदि भाषाओं पर अच्छी पकड़ थी। इसके साथ ही वे भू-विज्ञान एवं कृषि के अच्छे जानकर भी थे। महात्मा गांधी के स्वदेशी आन्दोलन के चलते उन्होंने अमरीका से कम्बोडिया नामक कपास की बीज मंगाकर, इसे भारत के कपास बीज के साथ अंकुरित कर भारतीय संकरित कपास का बीज तैयार किया। उनके इस शोध कार्य के लिए बाद में इन्हें ‘वेंकैय्या कपास’ के नाम से जाना जाने लगा। सन 1916 में पिंगली वेंकैया ने एक ऐसे ध्वज की कल्पना की जो सभी भारतवासियों को एक सूत्र में बाँध दे। उनकी इस पहल को एस.बी. बोमान जी और उमर सोमानी जी का साथ मिला और इन तीनों ने मिल कर नेशनल फ़्लैग मिशन का गठन किया। कई सालों तक काफ़ी तर्क वितर्क के बाद भी जब सब एकमत नहीं हो पाए तो सन् 1931 में अखिल भारतीय कांग्रेस के ध्वज को मूर्त रूप देने के लिए 7 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। इसी साल कराची कांग्रेस कमेटी की बैठक में पिंगली वेंकैया द्वारा तैयार ध्वज, जिसमें केसरिया, श्वेत और हरे रंग के साथ केंद्र में अशोक चक्र स्थित था, को सहमति मिल गई। 15 अगस्त 1947 को तिरंगा हमारे देश की आज़ादी का प्रतीक बना। राष्ट्रीय ध्वज बनाने के बाद पिंगली वेंकैय्या का झंडा “झंडा वेंकैय्या” के नाम से लोगों के बीच लोकप्रिय हो गया। 4 जुलाई, 1963 को पिंगली वेंकैय्या का निधन हो गया।