
Stop Inhuman maila pratha
जयपुर। देश को आजाद हुए 70 साल हो चुके हैं, लेकिन मानवता पर कलंक कही जाने वाली मैला ढोने की प्रथा आज भी राजस्थान में कायम है। ये कड़वा सच सामने आया है राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष के साथ हुई प्रदेश के आला अधिकारियों की बैठक में। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष मनहर वल्जीभाई झाला की मुख्य सचिव डीबी गुप्ता और पुलिस महानिदेशक ओपी गल्होत्रा सहित विभागों के आला अधिकारियों के साथ हुई बैठक में मैला ढोने की प्रथा की जमीनी हकीकत जानने के लिए किए जा रहे सर्वे के आंकड़े पेश किए गए।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जे.सी. मोहंती ने मैला ढोने की प्रथा संबंधी आंकड़े पेश किए। एसीएस मोहंती ने बताया कि प्रदेश में हाथ से मैला ढोने वाले परिवारों का सर्वे अन्तिम चरण में चल रहा है। प्रदेश के 20 जिलों में हो रहे सर्वे में अब तक 7,057 परिवारों ने हाथ से मैला ढोने वाले परिवारों के लिए बनाई गई पुनर्वास योजना में आवेदन किए हैं। विभाग की जांच में 706 आवेदन सही पाए गए हैं। सरकार ने माना है कि 706 परिवार आज भी हाथ से मैला ढो रहे हैं। अब इन परिवारों की सूची तैयार कर भारत सरकार को भेजी जा रही है।
सरकार ने 6,300 परिवारों से मुंह फेरा
सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग के आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 7,057 परिवारों ने हाथ से मैला ढोने वाले परिवारों की पुनर्वास योजना में आवेदन किया है। लेकिन विभाग ने सिर्फ 706 परिवारों को ही इस योजना के लिए पात्र माना है। ऐसे में सवाल उठता है कि उन 6,300 परिवारों का क्या होगा, जिन्होंने कहा है कि वे आज भी हाथ से मैला ढो रहे हैं और सरकार उन्हें इस कलंक से मुक्ति दिलाए। लेकिन सामाजिक न्याय एवं आधिकारिता विभाग ने उनका पुनर्वास करने से इनकार कर दिया है। यही नहीं विभागीय सर्वे में जिन 706 परिवारों को मैला ढोने वाले लोगों की पुनर्वास योजना के लिए पात्र माना गया है, उन्हें भी अब तक कोई राहत नहीं दी गई है। इनकी सूची अब भारत सरकार को भेजी जाएगी। केन्द्र और राज्य सरकार मिलकर अब तक प्रदेश के सिर्फ 333 परिवारों का ही पुनर्वास कर पाई है, जो मैला ढोते थे।
5 साल से मुआवजा नहीं अब 15 दिन में देंगे
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष के साथ ही बैठक में सीवरेज सफाई के दौरान जहरीली गैस या अन्य कारणों से जान गंवाने वाले सफाई कर्मचारियों के परिवारों को मुआवजा देने की मुद्दा भी उठा। बताया गया कि 2012 से लेकर 2018 तक 28 सफाई कर्मचारी ऐसे रहे, जिनकी मौत सीवरेज सफाई करते समय हुई। लेकिन मृतकों के परिवारों को अब तक कोई मुआवजा नहीं दिया गया। इस पर मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग अध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि 15 दिन में मृतकों के आश्रित परिवारों को मुआवजा दे दिया जाएगा।
दोबारा जांच की मांग—
मैला ढोने वाले जिन परिवारों ने आवेदन किया और सरकार ने उनको सही नहीं माना है, उसकी दोबारा जांच करवाने की मांग की गई है। इसे लेकर राष्ट्रीय सफाई आयोग अध्यक्ष से बात की गई है। आयोग अध्यक्ष ने सरकार से इस पर कदम उठाने के लिए कहा है। साथ ही मृतक सफाई कर्मचारियों के आश्रितों को मुआवजा भी कई सालों से अटका हुआ है।
राजकुमार, प्रदेशाध्यक्ष, अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ, जयपुर
Published on:
30 Jun 2018 11:35 am
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