
जयपुर। ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज मंत्री Rajendra Rathore की पत्नी चांदकंवर के लिए शादी के शुरुआती वर्षों की करवा चौथ काफी भावुकता भरी रही। चांदकंवर ने बताया, 1979 में मेरा विवाह हुआ। ग्यारह साल तक हनुमानगढ़ अपने ससुराल में रही। हर साल करवा चौथ पर पूरे मन से पति के लिए व्रत रखा लेकिन व्यस्तता के कारण वे (राजेन्द्र) किसी भी करवा चौथ (Karwa Chauth) पर घर नहीं पहुंच पाए। दाम्पत्य जीवन में ऐसे पल तो मुश्किल होते ही हैं, जब आप इंतजार करें और वे न आ पाएं। लेकिन यही सोचती थी कि वे जहां भी हैं, मेरे सामने ही हैं।
यों यादें साझा करते-करते चांदकंवर एकबारगी भावुक हो गईं। फिर बोलीं, राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी जटिलता हमारे लिए तो यही है। जो सार्वजनिक जीवन जीता है, उसे पारिवारिक जीवन के कई अनमोल क्षण खोने पड़ते हैं।
वहीं इधर इस विधायक ने करवा चौथ की कहानी एक गांव में सुनी, व्रत दूसरे गांव में खोला
राजनीति में आने के बाद दशकभर हो गया, करवा चौथ हो या अहोई अष्टमी का व्रत, भागमभाग के बीच ही परम्परा का निर्वहन करना पड़ रहा है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान रखा करवा चौथ का व्रत तो कभी नहीं भूल पाऊंगी। तब चौथ माता की कहानी कहीं सुनी, चन्द्रदेव को अघ्र्य किसी गांव में दिया और व्रत कहीं दूसरी जगह खोला। यह कहना है विधायक शकुन्तला रावत का। गत विधानसभा चुनाव के दौरान रखे करवा चौथ के व्रत का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया, चुनाव का समय था। प्रचार के लिए सुबह जल्दी घर से निकल जाती थी। करवा चौथ के दिन भी सुबह 7 बजे अलवर स्थित निवास से समर्थकों के साथ रवाना हो गई थी। शाम 4 बजे बानसूर के हरसौरा गांव में चौथ माता की कहानी सुनी। रात 9.30 बजे कटारिया का बास में हैण्डपम्प से पानी भरकर अध्र्य अर्पित किया। फिर हमीरपुर पहुंचकर सैनी परिवार में महिलाओं के साथ व्रत खोला।
Updated on:
10 Nov 2018, 5:56 PM IST
Published on:
26 Oct 2018, 10:45 AM IST
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