
Black and White से स्मार्ट टीवी का सफर
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साल 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने टेलीविजन के प्रभाव को आम जिंदगी में बढ़ता देख 21 नवंबर का दिन विश्व टेलीविजन दिवस या world television day के रूप में मनाने का ऐलान किया। संयुक्त राष्ट्र के सामने जब टेलीविजन दिवस का प्रस्ताव गया तो सबसे पहला सवाल उठा कि विश्व टेलीविजन दिवस क्यों मनाया जाए?
इसके पीछे तर्क था कि टीवी के जरिए सामाजिक, आर्थिक और आम आदमी के जीवन से जुड़ी कई परेशानियों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। टेलीविजन एक ऐसा जरिया है, जिसकी मदद से लाख- दो लाख नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को एकसाथ संदेश आसानी से पहुंचाया जा सकता है। मौजूदा समय में मीडिया की ताकत टीवी की अहमियत का सबसे बड़ा उदाहरण हैं।
भारत में पहली बार लोगों को टीवी के दर्शन 1950 में हुए, जब चेन्नई के एक इंजीनियरिंग स्टूडेंट ने एक प्रदर्शनी में पहली बार टेलीविजन सबके सामने रखा। भारत में पहला टेलीविजन सेट कोलकाता के एक अमीर नियोगी परिवार ने खरीदा था। 1965 में ऑल इंडिया रेडियो ने रोजाना टीवी ट्रांसमिशन शुरू कर दिया। 1976 में सरकार ने टीवी को ऑल इंडिया रेडियो से अलग कर दिया गया। 1982 में पहली बार राष्ट्रीय टेलीविजन चैनल की शुरूआत हुई। यही वो साल था, जब भारत में पहला कलर टीवी भी आया।
80-90 का दशक भारत में टेलीविजन के विस्तार का रास्ता खोलता गया। दूरदर्शन पर महाभारत और रामायण जैसी सीरियलों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। कहा जाता है कि जब महाभारत या रामायण टीवी पर आता था तो सड़कों पर मानों कर्फ्यू सा लग जाता था। 90 के दशक में टेलीविजन चैनल का सारा काम प्रसार भारती को सौंप दिया गया था।प्रसार भारती ने इसी दशक में दूरदर्शन के साथ डीडी2 नाम से चैनल शुरू किया, जिसका बाद में नाम बदलकर डीडी मेट्रो कर दिया गया। 1991 में नरसिम्हा राव जब प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने टीवी के विस्तार की शुरुआत
की। इसके बाद प्राइवेट चैनलों की एंट्री हुई। प्राइवेट चैनलों को एक के बाद एक लाइसेंस मिलते गए और पिछले कुछ सालों में भारत में प्रसारित होने वाले चैनलों की संख्या 1000 के आसपास पहुंच चुकी है।
21वीं सदी के शुरुआती सालों में जब केबल टीवी का प्रचलन शुरू हुआ, तब कहीं जाकर भारत में सही तरीके से रंगीन टीवी का दौर आया। सीआरटी टेलीविजन के दौर आया एलसीडी और प्लाज्मा टीवी का, जिसकी कुछ ही सालों में जगह एलईडी ने ले ली। आज के दौर में टीवी किसी कंप्यूटर की तरह स्मार्ट हो गए हैं।सिर्फ टेलीविजन चैनलों की नहीं, टीवी खरीदने वालों की दुनिया भी बदल रही है। 1980 के दशक का ब्लैक एंड व्हाइट 14 इंच का टीवी अब 50 इंच तक पहुंच चुका है और रंगीन तो छोड़िए, एचडी, प्लाजमा होता हुआ 3डी की बातें कर रहा है। यूरोप में कम से कम 20 ऐसे चैनल हैं, जो 3डी चैनल को प्रायोगिक स्तर पर पुहंचा चुके हैं। चीन के सरकारी चैनल ने भी हाल ही में 3डी चैनल की शुरुआत कर दी है।
टेलीविजन चैनलों के लिए इस साल का लंदन ओलिम्पिक बड़ा इम्तिहान होगा। इस दौरान खेलों का प्रसारण 3डी तकनीक में भी किया जाएगा। बीबीसी इसके ओपनिंग और क्लोजिंग सेरेमनी के अलावा हर शाम हाइलाइट 3डी में दिखाएगा। इतना ही नहीं, ओलिम्पिक की सबसे बड़ी प्रतियोगिता यानी 100 मीटर रेस भी 3डी में प्रसारित किया जाएगा। इससे टेलीविजन की दुनिया पूरी तरह बदल सकती है। 100 देशों के करीब 12,000 लोग टेलीविजन मेले में जमा हो रहे हैं।
Published on:
21 Nov 2019 12:57 pm
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