राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि चुनाव से पहले इन पर हस्तक्षेप किया, तो लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होगी और समय पर चुनाव कराना मुश्किल होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया था कि पंचायती राज संस्थाओं के पुनर्गठन में नियमों व प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया। पुनर्गठन की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है।