
नागौर जिले के गोगोर निवासी प्रगतिशील किसान गोपाल राम किल्डोलीया ने 5 बीघा मे काले गेहूं का उत्पादन लिया है। वे क्षेत्र के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। काले गेहूं का बाजार भाव अधिक रहता है । किसान ने इसके साथ ही सरसों, जौ, प्याज फसलों का उत्पादन भी किया है। उसके पास 6 होलिस्टियन नस्ल की गाय भी हैं जो कि 30 से 40 लीटर दूध प्रतिदिन दे रही हैं। फार्म पॉण्ड एवं जल हौज मे वर्षा जल का संग्रहण करके बूंद-बूंद सिंचाई पद्धति से खेती कर रहे हैं।
बाजार मांग अधिक
किसानों का रुझान सामान्य गेहूं की तुलना में काले गेहूं के प्रति बढ़ रहा है। इस किस्म के गेहूं की बाजार मांग व निर्यात अधिक से किसानों का झुकाव स्वाभाविक है। इस फसल की बुवाई का रकबा बढ़ रहा है।
बीमारियों में फायदेमंद
इस गेहूं में मिलने वाला एंथ्रोसाइनीन एक नेचुरल एंटी ऑक्सीडेंट व एंटीबायोटिक है, जो हार्ट अटैक, कैंसर, डायबिटीज, मानसिक तनाव, घुटनों का दर्द, एनीमिया जैसे रोगों में बहुत ही फायदेमंद है।
रबी में होती है इसकी खेती
काले गेहूं के लिए नमी बेहद जरूरी है। इस फसल की पहली सिंचाई तीन हफ्ते बाद करें। फुटाव के समय, गांठें बनते समय, बालियां निकलने से पहले, और दाना पकते समय सिंचाई अवश्य करें।
बढ़ सकती है तीन गुना कमाई
इसका सामान्य उत्पादन 10-12 क्विंटल प्रति बीघा है। इसकी खेती से किसानों की कमाई तीन गुना तक बढ़ सकती है। इस बारे में कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
कई जिलों में काला गेहूं की फसल की बुवाई का रकबा बढ़ रहा है। इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
डॉ. राम निवास ढाका, लेखक कृषि विज्ञान केंद्र, पोकरण में कृषि वैज्ञानिक हैं
Published on:
19 May 2022 04:20 pm
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