
blind faith
बांसवाड़ा।
राजस्थान में एक बार फिर अंधविश्वास के चलते एक मासूम की जान फिर खतरें में डाल दी। प्रदेश के बांसवाड़ा जिलें में अंधविश्वास के चलते उपचार के नाम मासूम को गर्म सलाखों से दागने का सिलसिला फिर से देखा गया।
कुशलगढ़ क्षेत्र के भईड़ा गांव में परिजनों ने तीन माह के मासूम बेटे को उपचार के नाम पर गर्म सलाखों से दाग दिया। तबीयत में सुधार न होने पर परिजन मंगलवार को उसे महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। जिले के पाटन थाना क्षेत्र में भईड़ा गांव निवासी पानू पत्नी नारू सिंघाड़ा के तीन माह के मासूम बेटे को पिछले कुछ दिनों से ताण(मिर्गी) की शिकायत थी।
परिजन बच्चे को चिकित्सालय ले जाने की बजाय समीपवर्ती करण घाटी गांव लेकर गए, जहां भोपे ने बच्चे के बांये हाथ पर गर्म सुई से दाग दिया। बच्चे को डाम लगाने के 4-5 दिन बाद भी तबीयत में सुधार न होने पर परिजन उसे महात्मा गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने बताया कि परिजन बच्चे को ताण की बीमारी बता रहे हैं, लेकिन यह जांच- परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। बच्चा खतरे से बाहर है।
बच्चे की मां ने बताया कि बेटे की तबीयत खराब होने पर उसको गांव के पास ही करणी घाटी गांव में जाकर डाम लगवाया है, लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ। इसलिए असपताल लाए। वहीं, बच्चे के चचेरे भाई राजेश ने बताया कि बच्चे का पहले बुखार आया उसके बाद उसमें ताण के लक्षण दखाई दिए। गर्म सुई से दागने के बाद बच्चे की तकलीफ और बढ़ गई। डाम देने के चार-पांच दिन बाद भी बच्चे का हाथ छूने पर वो दर्द से कराह उठता हैै।
जिले में बच्चों को गर्म सलाखों से दागने का यह पहला मामला नहीं है। इस वर्ष की फरवरी से लेकर अभी तक एक के बाद एक कुल 6 मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रशासन या चिकित्सा विभाग की ओर से भोपों की रोकथाम या ग्रामीणों की समझाइश को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यहां तक की गत माह 14 तारीख को घोड़ी तेजपुर में सरेआम मासूम को डाम दिया गया था। जिसकी उपचार के दौरान उदयपुर में मौत हो गई थी।इसके बाद भी प्रशासन अभी तक नहीं चेता है।
Published on:
27 Jul 2018 03:42 am
