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नए शरीर में धड़कता रहेगा अशोक का दिल, दुनिया से जाते-जाते चार लोगों को दे गया ‘नई जिंदगी’

राजस्थान में एक शख्स के अंगदान से चार लोगों को नई जिंदगी मिली है। दुर्घटना में घायल होने के बाद ब्रेन डैड (Brain Dead) घोषित किए गए अशोक सैनी (Donor Ashok Saini) के लीवर, किडनी और हृदय को मरीजों में प्रत्यारोपित किया गया है।

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जयपुर

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Amit Purohit

Jan 20, 2023

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जयपुर के एसएमएस अस्पताल (SMS Hospital) में चूरू के सुजानगढ़ निवासी एक 28 वर्षीय दिल के मरीज को सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड (Brain Dead) घोषित किए गए 22 वर्षीय अशोक सैनी का दिल लगाया गया है। एसएमएस अस्पताल में यह पांचवा और मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत दूसरा सफल हृदय प्रत्यारोपण था। डोनर अशोक की दोनों किडनी और लिवर भी अलग-अलग मरीजों को लगाए जा चुके हैं।

डोनर अशोक सैनी को एक सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया था और 11 जनवरी को मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डोनर सीकर का रहने वाला था, जिसे ब्रेन इंजरी हुई थी। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने मस्तिष्क की सर्जरी की, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में स्थानांतरित कर दिया गया और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। बाद में 18 जनवरी को, डॉक्टरों की टीम के निरंतर प्रयासों के बाद भी कोई फायदा नहीं हुआ और ब्रेन डेथ पर गठित अस्पताल की समिति ने अशोक को ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अंग प्रत्यारोपण सलाहकारों ने परिवार को अपना अंग दान करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसके बाद परिवार ने उनका दिल, लिवर और दोनों किडनी दान करने की सहमति दी।

एसएमएस अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. राजकुमार यादव (Dr. Rajkumar Yadav) ने बताया, जिस मरीज को दिल लगाया गया है, वह कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy)से पीड़ित था। इस बीमारी में रोगी के दिल को शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त की आपूर्ति करने के लिए रक्त पंप करने में कठिनाई होती है। उनका दिल अपनी अपनी क्षमता का सिर्फ 15% काम कर रहा था और शरीर को ठीक से रक्त की आपूर्ति नहीं कर पा रहा था। ऐसे में वे अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकते थे। मरीज खुशकिस्मत हैं कि उन्हें 22 साल के एक डोनर का दिल मिला है। पोस्ट हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव केयर में रखा गया है।

क्या होती है ब्रेन डेथ:
किसी को ब्रेन डेड घोषित करने का मतलब है कि उसके मस्तिष्क ने सभी तरह से कार्य करना बंद कर दिए हैं, यानि कि शरीर को सिग्नल भेजने से लेकर समझने या बोलने की क्षमता तक हर क्रिया पर मस्तिष्क द्वारा विराम लग गया है। ब्रेन डेड की स्थिति में मरीज मृत माना जाता है। इस कंडीशन में दिमाग छोड़कर बाकी अंग जैसे हार्ट, लिवर, किडनी ठीक काम करते हैं। लेकिन इंसान सांस नहीं ले पाता, बोल नहीं पाता, हाथ पैर नहीं घुमा फिरा नहीं पाता।

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