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अब बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पार्क की टेक्नोलॉजी ही गायब

-स्थापत्य कला, शैली और प्राचीन आवासों को एक मॉडल के जरिए यहां किया गया था प्रदर्शित

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जयपुर

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Harshit Jain

Aug 27, 2018

jaipur

अब बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पार्क की टेक्नोलॉजी ही गायब

जयपुर. जर्जर बम्बू आवास, टूटे फव्वारे और बाउंड्री वाल, जगह-जगह कचरे का ढ़ेर। यही नजारा है मानसरोवर शिप्रा पथ स्थित राजस्थान आवास इन्फ्रॉस्ट्रक्चर की ओर से बनाए गए बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पार्क का। भारत की स्थापत्य कला, शैली और प्राचीन आवासों को एक मॉडल के जरिए यहां प्रदर्शित किया गया था, ताकि नई पीढ़ी इनके बारे में जान सके। इसके साथ ही ग्रामीण परिवेश को करीब से जानने का मौका इस पार्क में मिले इसके लिए यह पार्क बनाया गया लेकिन प्रॉपर मेंटीनेंस न होने के चलते आज इसके हालात बदहतर है। जिसकी ओर हाउसिंग बोर्ड का ध्यान नहीं है। वर्तमान समय में रोजाना सुबह और शाम के समय 250 से ज्यादा लोग पार्क को देखने आते हैं।

नहीं दिया जा रहा ध्यान
पार्क जब विकसित किया गया था, तब इसका जिम्मा राजस्थान आवास इन्फ्रॉस्ट्रक्चर की देखरेख में था। वर्ष 2014 में इसे हाउसिंग बोर्ड के सुपुर्द कर दिया गया। तब से इस पार्क के हालात खराब होते जा रहे हैं। कई महीनों में अधिकारियों की विजिट तो की जा रही है लेकिन महज यह खानापूर्ति साबित हो रही है। पार्क के मेंटीनेंस की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।


फैक्ट फाइल
-1999 में रखी थी नींव
- 2000 में हुआ उद्घाटन
-5 हैक्टेयर में फैला
-40 लाख रुपए की आई लागत
-250 लोग आते हैं रोजाना


यह हैं आकर्षण का केन्द्र
पार्क में पारम्परिक भवन निर्माण कला के साथ-साथ आधुनिक कला का भी प्रदर्शन किया गया है। पार्क में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाले मकान, झोंपड़ी, दुकानें, ट्री-गार्ड, बीकानेर के कच्चे मकान, करौली के लाल पत्थर का आवास, उन्नत गोल गांव की झोपड़ी, पशु गृह, जैसलमेर और बाड़मेर की हवेलियां है। गार्डन बेंच, वाटर टैंक, रोड, साइन बोर्ड, सीमेंट जॉली, रोड डिवाइडर, मिट्टी और सीमेंट की ईंटें, टाईल्स, पार्किंग शेड, डोर शटर और मेन हॉल भी यहां प्रदर्शित किए गए हैं। पार्क के चारों ओर फैरोसीमेंट की पट्टियां और जालियां लगाई हुई है।

बैंकॉक का मॉडल
पार्क में सबसे खास अग्निरोधक मकान भी बने हैं। इन मकानों की छतों पर राख-सीमेंट के बीच कोलतार की एक परत डाली गई है। टेक्नोलॉजी पार्क का मॉडल बैंकॉक के मकानों, पार्कों और फुटपाथ की डिजाइन पर आधारित है। ये मकान कम कीमत पर टनल शटरिंग पद्धति से दो-तीन दिन में बनाए जा सकते हैं। जयपुर विकास प्राधिकरण के लिए संस्थान ने इस पद्धति से पान विक्रेताओं के लिए दुकानें भी तैयार की थी जो फिलहाल शहर में विभिन्न स्थानों पर लगी हुई है। अल्प आय वर्ग के मकानों के मॉडल, पार्क में जयपुर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बनी झोपडिय़ों को प्रदर्शित किया गया है। इसके साथ ही पार्क में फैरोसीमेंट का एक फव्वारा भी है, जो वर्तमान समय में बंद पड़ा है।