
बीवीजी ने पांच साल तक हर नियम तोड़े, निगम ने नोटिस दिए और मौखिक कहा
जयपुर। बीवीजी कम्पनी ने राजधानी में कचरा संग्रहण का जिम्मा तो लिया, लेकिन उसके बाद से ही मनमानी शुरू कर दी। इतना ही नहीं, पांच वर्ष में कम्पनी ने निगम प्रशासन के नोटिस को भी गंभीरता से नहीं लिया। कम्पनी को 500 से अधिक नोटिस जारी किए गए और कई बार जोन अधिकारियों से लेकर मुख्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने कम्पनी प्रतिनिधियों से काम का ढर्रा सुधारने को कहा। कम्पनी ने किसी की नहीं सुनी और मनमानी करती रही।
हालांकि, हैरिटेज नगर निगम के बाहर होने के बाद कम्पनी ने ग्रेटर नगर निगम में काम का ढर्रा सुधारा है। बाहरी वार्डों में भी व्यवस्था बदली है और नियमित रूप से हूपर जा रहे हैं। हैरिटेज के 40 फीसदी संसाधन ग्रेटर नगर निगम सीमा क्षेत्र में लगाए हैं। साथ ही हूपर पर एक व्यक्ति को भी रखा है जो घरों से कचरा उठाकर गाड़ी में डालता है।
दरअसल, अब उच्च न्यायालय के फैसले के बाद ग्रेटर निगम कार्रवाई के लिए स्वतंत्र है। जल्द ही ग्रेटर नगर निगम मुख्यालय में बैठक होगी। उसमें कम्पनी का भविष्य तय होगा।
निगम के पास संसाधन नहीं
—ग्रेटर नगर निगम के पास संसाधनों की कमी है। 135 हूपर नगर निगम के पास हैं। जबकि, अभी प्रत्येक वार्ड में कम्पनी ने दो—दो हूपर चल रहे हैं। ऐसे में निगम के पास संसाधनों का अभाव है। डम्पर तो जरूरत खरीदे हैं, लेकिन उनकी संख्या भी पर्याप्त नहीं है। हालांकि, गैराज शाखा के अधिकारियों का कहना है कि यदि कम्पनी जाती है तो निगम अपने स्तर पर कचरा उठाने की व्यवस्था कर लेगा।
कम्पनी काम में सुधार कर रही है। इसी वजह से शहर में आने वाले शिकायतें कम हुई हैं। कम्पनी काम करेगी या नहीं, इसका फैसला निगम प्रशासन को करना है।
—उम्मेद सिंह, प्रोजेक्ट हैड, बीवीजी
शुरू से ही कम्पनी पर निगम की मेहरबानी रही। तभी तो 171 करोड़ रुपए का अग्रिम भुगतान कर दिया। कम्पनी ने हर शर्त को तोड़ा, उस पर निगम ने कोई सख्त कार्रवाई नहीं की। नोटिस और मौखिक ही कहा। कम्पनी को बाहर करेंगे और अपने स्तर पर निगम कचरा प्रबंधन का काम शुरू करेगा।
—पुनीत कर्णावट, उप महापौर, ग्रेटर निगम
Updated on:
07 Feb 2022 05:36 pm
Published on:
07 Feb 2022 05:30 pm
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