
सरकारी स्कूलों में एक दिन बाद 11 दिसम्बर से अद्र्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हो रही है और स्थिति ये है कि अधिकांश स्कूलों में अद्र्ध वार्षिक परीक्षाओं का कोर्स ही पूरा नहीं हो सका है जिसके कारण विद्यार्थी इन परीक्षाओं को परेशान हो रहे हैं।
पहले स्टॉफिंग पैटर्न के कारण शिक्षकों के तबादले होते रहे तो बाद में इस पैटर्न की खामियों से अधिशेष हुए शिक्षको के समायोजन ने शिक्षकों को कोर्स पूरा कराने में परेशानी हुई।
जैसे तैसे अक्टूबर तक शिक्षण कार्य पटरी पर आने लगा तो इसके बाद जनगणना अपडेशन के काम में शिक्षकों को लगा दिए जाने से एक बार फिर शिक्षकों के कोर्स अधूरे रह गए ।
एेसे में शिक्षक और छात्रों के लिए कोर्स पूरा होना संभव नहीं हो सका। अब सरकारी स्कूलों के छात्र अद्र्ध वार्षिक परीक्षाओं के लिए अपने घर पर कि ए शिक्षण व ट्यूशन के बल पर अपनी परीक्षाओ की अंजाम देने में जुटे है।
जनगणना अपडेशन कार्य में तो शहर के किसी स्कूल से तो लगभग 75 प्रतिशत से अधिक का स्टॉफ लगा दिया गया तो कहीं से 25 प्रतिशत शिक्षक भी नहीं लगाए गए।
जिन स्कूलों के प्रधानाध्यापको ने नगर निगम को स्थिति से अवगत कराया तो उल्टे उन्हे जनगणना में लगे शिक्षकों को शीघ्र कार्य मुक्त कर भेजने अन्यथाअनुशासनात्मक कार्यवाही करने का नोटिस भेज दिया गया
एेसे में रहे सहे शिक्षकों को भी कार्यमुक्त कर दिया गया जिससे संस्था प्रधानो के सामने कोर्स पूरा कराने की समस्या आ गई ।
जनगणना अपडेशन कार्य में किसी प्रकार की बाधा न हो तथा शिक्षण कार्य भी चलता रहे इसके लिए सरकार द्वारा एक विद्यालय से 25 प्रतिशत शिक्षकों को ही लगाने के निर्देश दिए गए थे लेकिन नगर निगम ने इन निर्देशों की पालना नहंी की जिसका खामियाजा छात्रो को भुगतना पड़ रहा है।
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