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विकास जैन
जयपुर. प्रदेश में आधुनिक तकनीकों से कैंसर के इलाज का सपना एक बार फिर करीब छह माह बढ़ गया है। पांच साल से बड़ी सुविधाओं का यह सपना गोल—गोल घूम रहा है। अब सामने आया है कि इस सेंटर के लिए आधुनिकतम मशीन लगाने के लिए कंपनियों ने रूचि ही नहीं दिखाई है। पेट स्केन मशीन के लिए तो कोई भी कंपनी निविदा प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुई। वहीं अन्य मशीनों के लिए भी सिंगल निविदा के बाद अब सभी के लिए दुबारा खरीद प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
राज्य कैंसर संस्थान की आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अक्टूबर 2017 में इस संस्थान की आधारशिला रखी थी। उस समय इसका निर्माण एक साल में पूरा करने का दावा किया गया, लेकिन यहां ओपीडी, इनडोर व कुछ अन्य सुविधाओं सहित इसका शुभारंभ फरवरी 2020 में किया गया। उसके बाद कोविड काल शुरू हो गया और संस्थान की अधिक प्रगति हो ही नहीं पाई। हालांकि इस बीच यहां आईपीडी सहित मेडिकल ओंकोलोजी और सर्जिकल ओंकोलोजी के कुछ आपरेशन थियेटर और आईसीयू ही शुरू कर दिए गए हैं।
सरकारी क्षेत्र में पहली होगी ये सुविधाएं, लेकिन कब !
बीते साल 2021 के अंत में दावा किया गया था कि नए साल के शुरूआती तीन महीनों में यहां आधुनिक मशीनें काम करना शुरू कर देगी। इन सुविधाओं में मॉलिक्यूलर ओंकोलोजी, पेट स्केन और गामा कैमरे जैसी सुविधाएं शामिल हैं। मॉलिक्यूलर ओंकोलोजी से कैंसर मरीजों में कैंसर होने के जेनेटिक कारणों का पता राज्य में ही चल सकेगा, जिससे उन्हें सही लाइन की दवा देने में आसानी होगी। इससे उन्हें अनावश्यक तौर पर कीमोथैरेपी और उससे होने वाले दुष्प्रभावों का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके घातक दुष्प्रभावों में बाल झड़ने जैसी बड़ी समस्या भी शामिल है। जिससे मरीज मानसिक परेशानी से भी गुजरते हैं। मॉलिक्यूलर ओंकोलोजी से जीन पर रिसर्च एडवांस स्टडी होगी। अभी तक इसके लिए सैंपल दिल्ली, मुंबई आदि शहरों में भेजे जाते हैं। संस्थान की बेड सीमा 300 से 350 रखी गई है।
अभी..80 प्रतिशत का एसएमएस, 20 प्रतिशत का संस्थान में इलाज
इस समय कैंसर के 80 प्रतिशत मरीजों का इलाज एसएमएस और 20 प्रतिशत का कैंसर संस्थान में किया जा रहा है। जिसके कारण मरीजों को परेशानी भी होती है। राज्य सरकार की तैयारी एसएमएस के सभी कैंसर रोग विभागों को राज्य कैंसर संस्थान में ही स्थानान्तरित करने की है।
बोन स्केन और थायराइड स्केन की सुविधा मिलेगी
गामा कैमरे की सुविधा से इस संस्थान में बोन स्केन और थायराइड स्केन की सुविधा मिलेगी। अभी तक इनके लिए निजी केन्द्रों पर निर्भर रहना कैंसर मरीजों की मजबूरी थी। हालांकि पुर्नभरण आरएमआरएस के जरिये किया जाता है। लेकिन कई बार मरीज इन सब प्रक्रियाओं से गुजर ही नहीं पाते थे।
रेडियोथैरेपी और बोनमैरो का भी इंतजार
कैंसर संस्थान में रेडियोथैरेपी लीनियर एक्सलरेटर मशीन की खरीद भी होनी है। वहीं, संस्थान में बोनमैरो ट्रांसप्लांट यूनिट भी शुरू होगी। अभी ये दोनों सुविधाएं एसएमएस अस्पताल में भी उपलब्ध है।
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कोविड काल के बाद हमारा प्रयास जल्द से जल्द आधुनिक मशीनें यहां स्थापित करने का है। कंपनियों की अरूचि के कारण अब दुबारा प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं।
डॉ.संदीप जसूजा, अधीक्षक राज्य कैंसर संस्थान व विभागाध्यक्ष मेडिकल ओंकोलोजी, एसएमएस मेडिकल कॉलेज
Published on:
05 Mar 2022 04:07 pm
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