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जामडोली के दिव्यांग गृहों में बदहाली की तस्वीर, तीन करोड़ 74 लाख रुपए सालाना उठा रहे ठेकेदार, लेकिन बदले में खानापूर्ति

जामडोली के दिव्यांग गृहों में बदहाली की तस्वीर, निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं ठेकेदार के आधे कर्मचारी ही मौके पर मिले अब्दुल बारी/जयपुर. जामडोली स्थित बौद्धिक दिव्यांग बालक-बालिका गृह में रह रहे असहाय बच्चों की जिंदगी बदहाल हालात में गुजर रही है। कोर्ट के निर्देश पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर की टीम के निरीक्षण […]

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जयपुर

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Abdul Bari

Apr 17, 2026

जामडोली के दिव्यांग गृहों में बदहाली की तस्वीर, निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

ठेकेदार के आधे कर्मचारी ही मौके पर मिले

अब्दुल बारी/जयपुर. जामडोली स्थित बौद्धिक दिव्यांग बालक-बालिका गृह में रह रहे असहाय बच्चों की जिंदगी बदहाल हालात में गुजर रही है। कोर्ट के निर्देश पर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर की टीम के निरीक्षण में यहां की गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। दिसंबर में किए गए निरीक्षण की रिपोर्ट अब विशेष योग्यजन निदेशालय को सौंपी गई है। टीम ने एक कर्मचारी को दिव्यांग के साथ मारपीट करते देखा गया, जिसे टीम ने बेहद चिंताजनक माना है।

महिला विंग में 216 बालिकाओं के लिए केवल 104 बिस्तर मिले, जबकि कई पलंगों पर गद्दे, चादर और कंबल तक नहीं थे, ऐसे में दिव्यांग एक पलंग पर दो दिव्यांग सोने को मजबूर हैं। सर्दी के बावजूद बालिकाओं को बिना पर्याप्त बिस्तर के सोना पड़ा। यह हालात तब हैं जबकि 300 नए गद्दों की खरीद की गई है। वहीं डाइनिंग हॉल में टीवी तो लगा मिला, लेकिन टेबल-कुर्सियां नहीं होने से बालिकाएं फर्श पर बैठकर भोजन करने को मजबूर थीं। वॉशरूम जगह जगह गंदगी पसरी मिली, टॉयलेट में भी अव्यवस्थाओं की भरमार मिली।

पुरुष विंग में भोजन व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आई। तय मानक के अनुसार रोटियों पर लगाने के लिए 5 किलो घी के बजाय केवल 2 किलो घी ही उपयोग में लिया जा रहा था। पनीर, मूंगफली, अजवाइन और गुड़ जैसी सामग्री भी नियमित नहीं दी जा रही थी। टीम की पूछताछ और मौका स्थिति में यह सभी खामियां एक के बाद उजगार होती चली गईं। गर्म पानी के चार में से दो सोलर गीजर ही चालू मिले, जबकि हीटर होने के बावजूद उपयोग में नहीं लिए जा रहे थे।

25 की जगह टीम को 12-13 कर्मचारी मिले

पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि प्रतवर्ष दोनों विंगों में 74 लाख रुपए सफाई और करीब तीन करोड़ रुपए बच्चों की देखरेख और लालन-पालन के नाम पर ठेकेदार को दिए जा रहे हैं। शर्तों के मुताबिक एक समय तीन में से एक पारी में महिला में 28 और पुरुष विंग में 25 कर्मचारी होने चाहिए। जबकि पुरुष विंग में टीम को 12-13 कर्मचारी ही मौके पर उपस्थित मिले। ऐसे में ठेकेदारों के हर एक कामकाज में भी लगातार अनियमितताएं देखने को मिलीं। वहीं निदेशालय की ओर से दोनों विंगों में अलग अलग अधीक्षक और करीब 44 अधिकारियों कर्मचारियों की ड्यूटी रहती है।

इसलिए किया गया निरीक्षण

प्रोजेक्ट एबिलिटी एम्पावरमेंट के तहत नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर की टीम ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में बौद्धिक दिव्यांग गृहों (बालक-बालिका विंग) का निरीक्षण किया था, जिसमें संस्थानों की निगरानी और व्यवस्थाओं का आकलन किया गया।

जिम्मदार बोले-

कार्यवाही चल रही है, अभी बता नहीं सकते

मामले में बोलने से बचते दिखे जिम्मेदार: मामले में पत्रिका ने सेंटर फॉर एक्सीलेंस के निदेशक मनोज शर्मा से संपर्क किया, उन्होंने कहा कि इस विषय में निदेशालय के अतिरिक्त निदेशक चंद्रशेखर चौधरी ही बताएंगे। वहीं चौधरी ने कहा कि विभागीय कार्यवाही चल रही है, अभी बता नहीं सकते।

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