राज्य के नए जिलों में एससी-एसटी एक्ट की जांच के लिए डिप्टी एसपी की अध्यक्षता में सैल बनेगी।
राज्य के नए जिलों में एससी-एसटी एक्ट की जांच के लिए डिप्टी एसपी की अध्यक्षता में सैल बनेगी। इसके साथ ही महिला व बाल अपराधों के लिए एडिशनल एसपी की अध्यक्षता में सिकाउ यूनिट का गठन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में मंगलवार को सीएमआर में अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत गठित राज्य स्तरीय सतर्कता और मॉनिटरिंग समिति की बैठक में यह फैसले हुए। गहलोत ने कहा कि एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में पुलिस बिना किसी दबाव व
भयमुक्त होकर त्वरित अनुसंधान कर उन्हें न्याय दिलाना सुनिश्चित करें।
यह भी हुए फैसले:
एससी-एसटी एक्ट के प्रकरणों के निस्तारण का समय वर्ष 2017 में 197 दिन था। अब यह समय 64 दिन रह गया है। इसे 60 दिन से भी कम करने के प्रयास किए जाएंगे।
एससी-एसटी एक्ट के मामलों में पीड़ित प्रतिकर सहायता का भुगतान समयबद्ध तरीके से हो। केंद्र सरकार से मिलने वाला राशि में विलम्ब होने पर केंद्र सरकार से पत्राचार किया जाएगा।
एससी-एसटी एक्ट की एफआईआर के साथ ही पीड़ित को पीड़ित प्रतिकर योजना का लाभ देने के लिए जरूरी जानकारियां भी पुलिस सुनिश्चित करेगी।