
रविदास मंदिर के निर्माण को वहीं भूमि देगा केंद्र
नई दिल्ली. तुगलकाबाद में संत रविदास मंदिर को ढहाने के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि वह लोगों की आस्था को देखते हुए उसी स्थान पर 200 वर्ग मीटर जगह मंदिर के लिए देने को तैयार है।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ को इस संबंध में जानकारी दी। वेणुगोपाल ने बताया कि सात में से पांच पक्षकारों से बात हो चुकी है और केंद्र के अधिकारियों ने भी मंजूरी दे दी है। पीठ ने इसे रेकॉर्ड पर लेते हुए मामले को 21 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है। मंदिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गिराया गया था।
10 अगस्त को ढहा दिया था मंदिर
डीडीए का दावा है कि मंदिर अवैध तरीके से कब्जाई जमीन पर बना था। सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त को आदेश दिया था कि 13 अगस्त से पहले मंदिर गिरा दिया जाए। 10 अगस्त को मंदिर गिरा दिया गया। इसके बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। दिल्ली में भी एक बड़ी रैली निकाली गई थी।
निर्देश: सभी बातचीत से हल निकालें
बीते 4 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह सभी की भावनाओं का समान करता है। पीठ ने सभी पक्षकारों को कहा था कि वो अटार्नी जनरल से मिलकर इस मामले में किसी दूसरी जमीन पर मंदिर के निर्माण के लिए हल निकालें। पीठ ने कहा था कि यह मंदिर वन क्षेत्र पर बना था और अदालत अन्य जमीन पर मंदिर बनाने पर विचार कर सकती है।
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष पहुंचे थे कोर्ट
हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक तंवर और पूर्व मंत्री प्रदीप जैन ने इस मामले को गलत तथ्य देने और पूजा के अधिकार के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ले गए थे।
अदालत के फैसले को कोई राजनीतिक रंग नहीं दे सकता
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा था कि कोर्ट के आदेशों को धरती पर कोई भी राजनीतिक रंग नहीं दे सकता। पीठ ने ये टिप्पणी उस समय की जब केंद्र की ओर से बताया गया कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक मंदिर को ढहा दिया गया है जबकि 18 संगठनों ने इस दौरान कार्रवाई का विरोध किया। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में इसका विरोध हो रहा है इसलिए इन सरकारों को निर्देश दिए जाए कि वो कानून व्यवस्था के मुद्दों की देखभाल करें।
Published on:
19 Oct 2019 01:51 am
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