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केंद्र सरकार की सख्ती बेअसर…सट्टेबाजी के विज्ञापनों से पाट दिए बस शेल्टर-चौराहे

सट्टेबाजी के विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। सरकार नहीं चाहती कि सट्टेबाजी के विज्ञापनों को देखकर युवा आकर्षित हों। इससे युवाओं को बचाने के लिए छह मार्च को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की गाइडलाइन जारी की। गाइडलाइन में साफ लिखा कि सार्वजनिक जुआ अधिनियम-1867 के तहत सट्टेबाजी और जुआ सख्ती से प्रतिबंधित है।

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जयपुर। सट्टेबाजी के विज्ञापनों को लेकर केंद्र सरकार सख्त है। सरकार नहीं चाहती कि सट्टेबाजी के विज्ञापनों को देखकर युवा आकर्षित हों। इससे युवाओं को बचाने के लिए छह मार्च को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) की गाइडलाइन जारी की। गाइडलाइन में साफ लिखा कि सार्वजनिक जुआ अधिनियम-1867 के तहत सट्टेबाजी और जुआ सख्ती से प्रतिबंधित है।इसके बाद भी शहर की वीवीआइपी रोड जेएलएन मार्ग के कई बस शेल्टर से लेकर भीड़ भरे चौराहों पर एनएस पब्लिसिटी सट्टेबाजी के होर्डिंग लगाकर गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रही है। जहां ये होर्डिंग लगाए हैं, वे शहर की प्राइम लोकेशन हैं और हर वर्ग के लोगों की बड़ी संख्या में आवाजाही रहती है।

आदेश में लिखा

ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म और ऐप्स सीधे तौर पर गेमिंग की आड़ में सट्टेबाजी और जुए का विज्ञापन नहीं कर सकते। ऐसी गतिविधियों से युवाओं पर वित्तीय और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पड़ता है। दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2019 के तहत निर्माताओं, विज्ञापनदाताओं, प्रकाशकों, मध्यस्थों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, समर्थनकर्ताओं व अन्य के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे।

निगरानी तंत्र फेल

ग्रेटर नगर निगम ने यूनीपोल और गैंट्री की नीलामी कर दी। यहां एनएस पब्लिसिटी ने ऐसे विज्ञापन लगा दिए, जिन्हें केंद्र सरकार प्रतिबंधित कर चुकी है। इसके बाद भी ग्रेटर नगर निगम प्रतिबंधित विज्ञापनों को हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया है। जबकि, विज्ञापन साइट की निगरानी के लिए निगम के पास जोन स्तर पर टीमें होती हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की सख्ती बेअसर

दो मई को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से राज्य के सभी मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर सट्टेबाजी पर प्रतिबंध लगाने की बात कही। इसके बाद भी फेयर प्ले, परीमैच, पोकरबाजी, बेटवे, वुल्फ 777 और 1*बेट में से कई के होर्डिंग अब भी शहर में लगे हुए हैं।

सजा और जुर्माने का है प्रावधान

-उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन देने वाले निर्माता को दो वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का जुर्माने का प्रावधान है।

-केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के निर्देशों का पालन नहीं करने पर छह महीने तक की जेल या 20 लाख रुपए तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।