
Chaitra Navratri
जयपुर. हिंदू धर्म में नवरात्र का विशेष महत्व होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार साल में चार बार नवरात्र आते हैं। इनमें दो दृश्य एवं दो गुप्त होते हैं। लेकिन इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्र को प्रमुख माना जाता है। चैत्र नवरात्र का प्रारंभ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। इस साल चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू हो रहे हैं, जिसका समापन 6 अप्रेल होगा। इस साल मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा। शास्त्रों में मां के हाथी पर सवार होकर आना भक्तों की समस्त इच्छाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है। खास बात ये है कि चैत्र नवरात्र के पहले दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। इस समय में घटस्थापना आपके लिए बहुत ही लाभदायक और उन्नतिकारक सिद्ध हो सकती है।
ज्योतिषाचार्या एवं टैरो कार्ड रीडर नीतिका शर्मा ने बताया कि चैत्र नवरात्र प्रतिपदा तिथि से ही नया हिंदू वर्ष प्रारंभ हो जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 29 मार्च को शाम 4:27 पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 30 मार्च को दोपहर 12:49 मिनट पर होगा।. उदया तिथि के अनुसार इस साल चैत्र नवरात्र 30 मार्च से शुरू होंगे और इसका समापन 6 अप्रेल को होगा। तिथि मतांतर से इस बार नवरात्र आठ दिन के रहेंगे। खास बात यह है कि महापर्व के दौरान चार दिन रवियोग तथा तीन दिन सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बनेगा।
इस बार चैत्र नवरात्र का आरंभ रविवार को होने से मां भगवती हाथी पर सवार होकर आएंगी और प्रस्थान भी हाथी पर बैठकर ही करेंगी। देवी पुराण के अनुसार जब मां दुर्गा की सवारी हाथी होती है तो यह एक बेहद ही शुभ संकेत माना जाता है। हाथी को सुख-समृद्धि और शांति का प्रतीक माना जाता है। माता जब हाथी पर सवार होकर आती हैं तो यह किसानों के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत होता है। इसका अर्थ है कि इस साल अच्छी फसल होगी और बारिश की भी कमी नहीं होगी। सोमवार 7 अप्रेल को समापन होने से हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी।
ज्योतिषाचार्या नीतिका शर्मा ने बताया कि 30 मार्च को चैत्र नवरात्र का शुभारंभ सर्वार्थ सिद्धि योग में हो रहा है। उस दिन इंद्र योग और रेवती नक्षत्र है। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 4:35 मिनट से अगले दिन सुबह 06:12 मिनट तक रहेगा। इस योग में साधक जो भी कार्य करेंगे, वें सफल व सिद्ध होंगे।
ज्योतिषाचार्या शर्मा ने बताया कि इस बार नवरात्र आठ दिनों के रहेंगे। अलग-अलग पंचांगों में तिथि को लेकर के अलग-अलग प्रकार की गणना में बताया गया है। कुछ पंचांगों में तृतीया, कुछ पंचांग में द्वितीया तथा कुछ पंचांग में तृतीया व चतुर्थी संयुक्त दी गई है। इस दृष्टि से गणना का अलग-अलग प्रभाव दिया गया है।
30 मार्च: प्रतिपदा- घटस्थापना और मां शैलपुत्री पूजा
31 मार्च: द्वितीया- मां ब्रह्मचारिणी पूजा तृतीया- मां चंद्रघंटा पूजा
01 अप्रेल: चतुर्थी- मां कुष्मांडा पूजा
02 अप्रेल: पंचमी- मां स्कंदमाता पूजा
03 अप्रेल: षष्ठी- मां कात्यायनी पूजा
04 अप्रेल: सप्तमी- मां कालरात्रि पूजा
05 अप्रेल: अष्टमी- मां महागौरी
06 अप्रेल: नवमी- मां सिद्धिदात्री , रामनवमी
Published on:
24 Mar 2025 01:52 pm
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