
चांद को क्या मालूम, नहीं चाहता उसे कोई चकोर
पक्षियों में एक पक्षी ऐसा है जिसे हिंदी साहित्य में खास जगह दी गई है। यह पक्षी है चकोर। चकोर यानी प्रेमी का प्रतीक। ऐसा प्रेमी जो अपनी प्रेमिका को निहारता है। चकोर को हिंदी साहित्यकारों ने वियोगी प्रेमी के रूप में पेश किया है जो अपनी प्रेमिका चांद को देख रोता रहता है। चकोर पक्षी के जीवन में देखें तो ऐसा कुछ नजर नहीं आएगा। न वह चांद का दीवाना है और ही वह उसे बहुत ज्यादा चाहता है। वह तो बेचारा अपने भोजन के लिए कीट-पतंगों की खातिर चांद की रोशनी में अधिक सक्रिय नजर आता है। यह तो साहित्यकारों की कल्पना है कि उन्होंने चकोर को चांद का दीवाना बना डाला। कई गद्य लेखकों और कवियों ने अपनी रचनाओं में चकोर पक्षी का चित्रण किया है।
चकोर पाकिस्तान का राष्ट्रीय पक्षी है। चकोर पक्षी मयूर कुल का प्राणी है। इसका शिकार किया जाता है। चकोर मैदान के बजाय पहाड़ों पर रहना पसंद करता है। यह पाकिस्तान, भारत, अफगानिस्तान, कजाकिस्तान आदि देशों में पाया जाता है, चकोर पक्षी की लंबाई 30 सेंटीमीटर तक होती है, इसका व्यवहार तीतर की तरह होता है जिस तरह पालतू तीतर अपने मालिक के पीछे पीछे चलते हैं उसी प्रकार चकोर पक्षी भी पालतू बनाए जाने पर अपने मालिक के पीछे पीछे चलता है.
Published on:
24 Mar 2020 03:54 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
