
अप्रेल से टैक्स नियमों में बदलाव, गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ को झटका
अब गोल्ड या सिल्वर के निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का फायदा नहीं मिलेगा। उन्हें इंडेक्सेशन का लाभ भी नहीं मिलेगा। उन्हें अप्रेल से मार्जिनल टैक्स रेट से टैक्स चुकाना होगा।
अब स्लैब के हिसाब से टैक्स
अप्रेल से नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है, जिसके चलते अब गोल्ड ईटीएफ को कितने भी समय तक रखे, लेकिन जब आप उसे बेचने जाएंगे तो उस पर होने वाले मुनाफे पर स्लैब रेट के हिसाब से ही टैक्स देना होगा। अब इसमें तीन साल या उससे ज्यादा समय बाद बेचने पर भी कोई इंडेक्सेशन बेनिफिट या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स जैसा कोई लाभ अब नहीं मिलेगा।
एसजीबी में निवेश करने का विकल्प
गोल्ड फंड्स के लिए टैक्स के नियम बदल जाने के बाद इनवेस्टर्स के पास सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानि एसजीबी में निवेश करने का विकल्प है। इसमें सालाना 2.5 फीसदी ब्याज मिलता है और इसका भुगतान हर छमाही में करना होता है।
फिजिकल गोल्ड में करें निवेश
गोल्ड में निवेश करना मतलब ज्वेलरी व सोने के बिस्किट-सिक्के आदि खरीदना है। निवेश बाजार के एक्सपर्ट्स गोल्ड की ज्वेलरी खरीदने को निवेश का सही तरीका नहीं मानते हैं, क्योंकि इसमें ग्राहक को बनाने का अधिक मानदेय देना होता है। गोल्ड की ज्वेलरी कभी भी 24 कैरेट सोने की नहीं बनती है, इसलिए सोने के बिस्किट व सिक्के में निवेश करना फायदे का सौदा होता है। अगर आप गोल्ड में निवेश करना चाहते है, तो सिक्कों व बिस्किट खरीद कर निवेश करें।
बढ़ती कीमतें निवेशकों पर डालती है दबाव
सोने की बढ़ती कीमतें निवेशकों पर भी दबाव डालती है, क्योंकि बहुत से लोग सुधार की उम्मीद में अपने निवेश को रोक कर रखते हैं। घरेलू स्तर पर बात करें, तो निवेशकों ने 2022 में अन्य संपत्ति वर्गों की तुलना में शेयरों में पैसा लगाना अधिक उचित समझा है। 2022 में निवेशकों ने शेयरों में 1.6 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया, जो इससे पिछले साल के 96,700 करोड़ रुपए के आंकड़े से कही अधिक है। निवेशक 8 साल तक अपना निवेश बनाए रखता है तो उसे कैपिटल गेंस पर किसी तरह का टैक्स नहीं देना पड़ता है।
ईटीएफ में निवेश के ये थे फायदे
- ईटीएफ डिविडेंड पर आयकर नहीं लगता था, जो अब अप्रेल से लगेगा
- ईटीएफ की खरीद-फरोख्त होने से कीमतों पर नजर है
- ईटीएफ को आसानी से बेचा जा सकता है
- ईटीएफ में निवेश अलग-अलग सेक्टर में कर सकते है
- ईटीएफ में एक्सपेंस रेशियो म्यूचुअल फंड के मुकाबले कम होता है
Published on:
15 Apr 2023, 4:45 PM IST
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