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बदलते बयानों से पुलिस के घेरे में मां 

तीन बच्चों की मौत और उनकी मां के जिंदा बचने की गुत्थी में पुलिस उलझी हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही यह मान लिया है कि बच्चों की हत्या हुई है। लेकिन इस वारदात को मां ने ही अंजाम दिया है या कोई और भी इसमें शामिल है। 

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afjal khan

Jul 13, 2015

तीन बच्चों की मौत और उनकी मां के जिंदा बचने की गुत्थी में पुलिस उलझी हुई है। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ही यह मान लिया है कि बच्चों की हत्या हुई है। लेकिन इस वारदात को मां ने ही अंजाम दिया है या कोई और भी इसमें शामिल है।

हालांकि पुलिस ने मां के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। बच्चों की मां संतोष बार-बार बयान बदल रही है। प्रारंभिक पूछताछ में संतोष ने पुलिस को बताया है कि रात को बच्चों ने गाय खोल दी। वह गाय को लाने गई तो पैर फिसलने से कुंड में गिर गई।

उसकी आवाज सुनकर उसके तीनों बच्चे आए। उसे बचाने के प्रयास में तीनों कुंड में गिर गए। उसने कुंड के अंदर बच्चों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी ज्यादा होने के कारण वह अपने बच्चों को बचा नहीं पाई।

लेकिन कुंड की बनावट और मौके के हालात संतोष के बयानों से मेल नहीं खाते हैं। ऐसे में पुलिस संतोष को ही बच्चों की हत्या व आत्महत्या के प्रयास का आरोपित मानकर जांच कर रही है।

चार फीट आठ इंच पानी भरा था कुंड में
तीन बच्चों की मौत का गवाह बना यह कुंड छह फीट गहरा एवं चार फीट चौड़ा है। कुंड में चार फीट आठ इंच पानी भरा हुआ था। मौत के शिकार हुए अनीष और जितेन्द्र तो छोटे थे, लेकिन 12 वर्षीय बेटी करूणा की कद काठी ठीक थी।

महिला का कहना है कि बच्चों ने गाय खोल दी थी। लेकिन उसकी सांकळ वहीं पड़ी थी। बच्चों ने मां को निकालने के लिए ना तो परिजनों को फोन किया और ना ही सांकळ या किसी वस्तु को उसे निकालने के लिए काम लिया।

करुणा की लम्बाई भी मां के लगभग समान ही थी। मौके के हालात से ये माना जा रहा है कि दोनों बेटों की मौत तो पानी में डूबने से हो गई। बेटी ने निकलने का प्रयास किया तो संतोष ने उसे अपने पैरों के नीचे दबा लिया। रातभर वह उसके शव के ऊपर खड़ी रही।
पुलिस अभी यह समझ नहीं पा रही है कि संतोष ने अकेले इस सवा फीट चौड़े ढक्कन वाले कुंड में तीन बच्चों को कैसे डाला।

मोबाइल खोल सकता है राज
पुलिस अधीक्षक राहुल बारहट ने भी रतनगढ़ अस्पताल पहुंचकर महिला एवं परिजनों से पूछताछ की। एएसपी बुगलाल मीणा ने हामूसर जाकर घटनास्थल का निरीक्षण किया ग्रामीणों एवं परिवारजनों से पूछताछ की। संतोष के मोबाइल को पुलिस ने जब्त कर लिया है। उसके कॉल डिटेल की जांच की जा रही है।

पीहर पक्ष ने जताया विरोध: मौके पर पहुंचे पीहर पक्ष ने विरोध जताते हुए कहा कि उनकी बेटी जिंदा पानी में तड़पती रही। लेकिन ग्रामीण व पुलिस देखते रहे,उसे निकालने का प्रयास नहीं किया। वहीं पुलिस का कहना है कि खुद पीहर पक्ष ने कहा था कि जब तक वे नहीं पहुंचे,शवों को नहीं निकाला जाए। इससे पहले महिला में कोई हरकत नजर नहीं आ रही थी।

दूध जमाया, खळ भिगोई... और खोल दिए पशु
मौके के हालात को देखते बच्चों की हत्या योजनाबद्ध नहीं लग रही। परिवार के सभी लोगों ने रात का खाना खाया है। इसके बाद पशुओं का दूध का दही जमाया गया है। पशुओं को चारे के साथ सुबह दी जाने वाली खल को भी पानी में भिगोया गया है।

मकान के बाहर सभी की सोने के लिए चार पाई भी लगी हुर्ह थी। अब तक की पूछताछ में पुलिस के सामने परिवार में किसी तरह के क्लेश की बात भी सामने नहीं आई है। महिला का पति इंद्रचंद और उसके दोनों भाई अलग-अलग मकानों में रहते हैं। संतोष की बड़ी बहिन कंचन की भी इसी घर में शादी हुई है।