
जोधपुर. पायलट स्टडी विशिष्ट महानगर (एनआई कोर्ट) के न्यायाधीश सिद्धेश्वर पुरी ने एक करोड रुपए रोकड़ उधार देने की आर्थिक क्षमता को साबित नहीं करने के आधार पर चेक अनादरण के आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
प्रकरण के अनुसार देसूरी निवासी घीसूसिंह ने वर्ष 2017 में ललित कुमार के खिलाफ न्यायालय में परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 के तहत परिवाद पेश कर बताया कि आरोपी ने अपने व्यवसायिक जरूरतों की पूर्ति के लिए एक करोड़ रुपए नगद उधार लिए तथा इकरारनामा भी निष्पादित करवाया। भुगतान के बदले परिवादी को 50-50 लाख के दो चेक दिए लेकिन बैंक में दोनों चेक अपर्याप्त निधि के कारण लौटा दिए। आरोपी की ओर से कहा गया कि जिस दिन इकरारनामा के निष्पादन की दिनांक बताई है उस दिन वह देश के बाहर मलेशिया में था। परिवादी द्वारा पेश किए गए बैंक रिटर्निंग मीमो और अन्य सबूत पर भी संदेह जताया।
विश्वसनीय नहीं परिवाद:
परिवादी ने स्वीकार किया कि वह 15-20 हजार रुपए मासिक पर नौकरी करता है। मुंबई में एक कमरे में किराए पर रहता है। कुछ वर्ष पूर्व वह अभियुक्त के पिता की दुकान पर नौकरी भी कर चुका है वहां बैंक का काम भी करता था। कोर्ट ने केस लगाने वाले के इन बयानों के आधार पर परिवाद को विश्वसनीय नहीं मानते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
Published on:
08 Feb 2023 03:12 pm
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