जयपुर. गणेश चतुर्थी के पर्व पर दिनभर भक्तों की चहल पहल रही। घर-मंदिर और प्रतिष्ठा में प्रथम पूजा-अर्चना की। द्वारपाल गणेश जी का अभिषेक कर सिंदूरी चोला धारण कराकर डंके अर्पित किए गए। गुड़ धानी का भोग लगाकर धूप-दीप से आरती की गई। घरों में विराजे गणपति को दाल-बाटी-चूरमे का भोग लगाया। गुलाबी थीम पर रोशनी से लकदक मंदिर की साज सज्जा को भक्तों ने अपने कैमरे में कैद किया। मंदिर के आसपास दुकाने लगी होने के कारण मेले का सा नजारा रहा। भक्तों ने कहा कि छोटीकाशी में शुरू से ही हर धर्म के लोगों की गहरी आस्था है। चारदीवारी के मुख्य द्वारों पर स्थापित गणेशजी पूजन किया। गणेश पूजन समिति संयोजक महेंद्र कुमार चित्तौडिया ने बताया कि परकोटे के 14 गेटों और एक कनक घाटी गेट पर मीणा, गुर्जर, कोली, पारीक, जैन सहित अन्य समाजों की ओर से पूजन किया।

खरीदारी के लिए चहल—पहल
अबूझ मुहूर्त होने के कारण गणेश चतुर्थी को बड़ी संख्या में वाहनों की खरीददारी हुई। गृह प्रवेश, दुकानों का शुभारंभ और नींव पूजन के कार्यक्रमों की भी धूम रही। दिनभर मॉल्स से लेकर बाजार में चहल पहल नजर आई। वाहन पूजन के लिए ध्वजाधीश गणेश मंदिर, नहर के गणेश जी मंदिर में वाहनों की कतारें नजर आई। लगभग तीन हजार से अधिक वाहनों की बिक्री हुई। ज्वैलरी की दुकानों पर भी भीड़ रही।
दिनभर भक्तों का कारवां, भरा लक्खी मेला
दिनभर सूर्यदेव की तपिश भी भक्तों को डिगा नहीं पाई। भगवान गणेश की आस्था के आगे गर्मी बेअसर दिखी। इस दौरान नगर निगम की ओर से लाइनों में भक्तों के लिए छह दमकल के जरिए पानी का छिड़काव भी करवाया ताकि भक्तों को गर्मी से राहत मिल सके। सुबह से लेकर रात 11.30 बजे तक मंदिर की चौखट से लेकर जेएलएन मार्ग पर जेडीए सर्किल के बाद तक करीब 700 मीटर तक लाइनों में भक्तों का रैला नजर आया। तख्तेशाही रोड पर रिजर्व बैंक तक और एमडी रोड पर लंबी कतार देखने को मिली। सोमवार देर रात एक बजे से भी भक्त पदयात्राओं के रूप में पहुंचे। लगभग 250 से अधिक पदयात्राएं मंदिर में पहुंची। टोंकरोड से लेकर झालाना रोड और अन्य जगहों पर भक्तों के लिए नाश्ते से लेकर खाने की व्यवस्था की।
घर-घर विराजे गणपति
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर के महंत कैलाश शर्मा के सान्निध्य में सुबह चार बजे मंगला आरती से दर्शनों की शुरुआत हुई। सवा ग्यारह बजे गणपति का विशेष पूजन किया। साढ़े ग्यारह बजे श्रृंगार आरती, सवा दो बजे भोग आरती और शाम को सात बजे संध्या और रात 11.45 बजे शयन आरती हुई। टोंक रोड पर वाहनों का जाम लग गया।

स्वर्ण मंडित चांदी के सिंहासन पर विराजे गणपति विशेष पोशाक धारण किए हुए। शीश पर स्वर्ण मुकुट और पारंपरिक नौलखा श्रृंगार का आकर्षण का केन्द्र रहा। भगवान को लापसी, मोदक, पूड़ी, सब्जी का भोग लगाया। भक्तों को परेशानी न हो इसका पूरा ध्यान रखा। भगवान की तस्वीर के स्कैनर से देश दुनिया में लाखों भक्तों ने एक क्लिक पर दर्शन किए। स्वयंसेवक से लेकर पुलिस प्रशासन का पूरा सहयोग मिला। महाराष्ट्र की तर्ज पर राजधानी में भी गणेश जी की प्रतिमा की विधिवत स्थापना की गई। पंडाल भी सजाए। श्रद्धालु पांच, दस या इससे अधिक दिनों तक घर में विघ्नविनाशक की पूजा-अर्चना करेंगे।

नहर के गणेश मंदिर में महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में गणपति का मनोरम श्रृंगार किया गया। दिनभर श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। विशेष रोशनी आकर्षण का केंद्र रही। दिल्ली रोड स्थित बंगाली बाबा आश्रम स्थित गणेश मंदिर मेंगणपति का अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण कराई गई। फूल बंगला झांकी सजाकर छप्पन भोग अर्पित किए गए। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।