
जयपुर, 11 जुलाई।
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक विकास डॉ. दीप नारायण पांडेय का कहना है कि औषधीय पौधे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर हैं। इन औषधीय पौधों को वैद्यों की सलाह से उपयोग करना कल्याणकारी रहेगा। घर-घर औषधि योजना के व्यापक प्रचार के उद्देश्य से प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और परंपरागत आयुर्वेदिक ज्ञान से विद्यार्थियों और अभिभावकों को जागरुक करने के लिए रविवार को जयश्री पेड़ीवाल ग्लोबल स्कूल की ओर से जागरुकता सत्र आयोजित किया गया। घर-घर औषधि योजना के बारे में जानकारी देते हुए पांडेय ने कहा कि घर-घर में औषधीय पौधों को उगाने और स्वयं को स्वस्थ रखने में बच्चे और अभिभावक मिलकर सहयोगी बनें। यह कोई कोरा ज्ञान नहीं है बल्कि इस योजना के माध्यम से स्वास्थ्य की मुस्कान लाने का ठोस विचार है।
डॉ. पांडेय ने किसानों का जिक्र करते हुए बताया कि अगर किसान अपने बच्चों को खेती करना ना सिखाए तो हमें बाजार में खाने के लिए खाद्यान्न नहीं मिले, इसलिए बच्चों तक इन औषधीय पौधों को उगाने और रखरखाव की जानकारी और दादी-नानी के घरेलू उपचार के नुस्खे की जानकारी पहुंचाई जानी आवश्यक है। उन्होंने बच्चों से भी आह्वान किया कि वे इन पौधों के साथ बड़े हों। उनका ध्यान रखें। उन्हें जीवित रखें, समय-समय पर उनमें पानी देते रहें और उनका संरक्षण करें। धरती के चेहरे पर हरियाली की मुस्कान लाने के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक बताते हुए डॉ. पाण्डेय ने उम्मीद जताई कि घर-घर औषधि योजना के माध्यम से आमजन इसमें अपना सक्रिय सहयोग देंगे।
राजस्थान फॉरेस्ट्री एंड वाइल्ड लाइफ ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की अतिरिक्त निदेशक शैलजा देवल ने पहला सुख निरोगी काया की महत्ता और प्रजेंटेशन के जरिए घर-घर औषधि योजना की रूपरेखा बताते हुए स्कूल, विद्यार्थियों और बच्चों के साथ साथ अभिभावकों की योजना में भूमिका बतलाई। देवल ने कहा कि मौसमी बीमारियों की रोकथाम में भी इन पौधों की उपयोगिता प्राचीन काल से बनी हुई है। इन औषधीय पौधों के माध्यम से आयुर्वेद और परंपरागत ज्ञान को आम जन तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने घर घर औषधि योजना शुरू की है।
Published on:
12 Jul 2021 02:03 am
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