
JK Loan Hospital : राजस्थान में नवजात शिशुओं और बच्चों के सबसे प्रमुख अस्पतालों में शुमार किया जाने वाले जेके लोन अस्पताल में बच्चों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। बेड की कमी के कारण एक ही बेड पर दो बच्चों को रखना पड़ा रहा है। इसके कारण न केवल मरीज और परिजन को परेशानी हो रही बल्कि संक्रमण का भी खतरा बना हुआ है।
अस्पातल में 22 दिन से लगातार ऐसे ही हालात देखे जा रहे हैं। इन दिनों डेंगू, मलेरिया, बुखार, आईफ्लू समेत कई मौसमी बीमारियां विकराल रूप दिखा रही हैं। अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 1400 बच्चे पहुंच रहे हैं। 300 से ज्यादा बच्चे गंभीर हालत में लाए जा रहे हैं। उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है। इस दौरान उन्हें बेड के लिए भी इंतजार करना पड़ रहा है।
जांच रिपोर्ट में अटक गया बच्चों का बेड
सबसे ज्यादा दिक्कत प्रीफेब वार्ड में आग लगने के कारण हुई है। 17 जून की रात प्री फेब के एसी में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी। वार्ड में भर्ती 46 को दूसरे वार्डों में शिफ्ट किया गया और उसका बंद कर दिया गया। अगले दिन चिकित्सा विभाग के प्रमुख सचिव टी रविकांत ने उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर 48 घंटे में जांच रिर्पोट पेश करने के आदेश दिए थे। रिपोर्ट के बाद मेंटीनेंस कार्य होना था लेकिन अभी तक जांच रिपोर्ट ही नहीं आई। इस कारण वार्ड बिना मेंटीनेंस के बंद पड़ा है।
हमेशा कम रहता बेड
जांच रिपोर्ट जैसे ही मिलेगी काम शुरू कर देंगे। बेड की 'कमी की बात करें तो वो तो हमेशा ही रहती है। -डॉ. कैलाश मीणा, अधीक्षक, जेकेलोन अस्पताल
Published on:
10 Aug 2023 11:03 am
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