जयपुर

Children’s Day 2022 : हमारे पूर्वजों ने दिए हैं दुनिया को कई बेहतरीन उपहार, बच्चों के लिए भी सुनहरा मौका

भारत, विश्व में सबसे अनोखा और कला संस्कृति से समावेशित देश है। यहां की बोलियां और भाषाएं हमारे धर्मग्रंथ की रचनाओं में उल्लेखित बातों से भी कई अधिक विशिष्टता लिए हुए है।

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Nov 13, 2022
उन्नति सिंह और रौनक कुमार

रौनक कुमार/ उन्नति सिंह

भारत, विश्व में सबसे अनोखा और कला संस्कृति से समावेशित देश है। यहां की बोलियां और भाषाएं हमारे धर्मग्रंथ की रचनाओं में उल्लेखित बातों से भी कई अधिक विशिष्टता लिए हुए है। हमारे पूर्वजों ने विश्व को कई ऐसी चीजें दी है जो वाकई बेहतरीन है, जिनके कारण ही आज दुनिया की यह तस्वीर उभरकर सामने आती है। जैसे अगर ज़ीरो नहीं होता तो चांद और मंगल पर जाना असंभव था, ऐसी ही कुछ चीजों की हम यहां बात करेंगे। हमारे साथियों के पास सुनहरा मौका है भारत को आगे बढ़ाने का। आइये हम सभी मिलकर हमारे देश को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पबद्ध हो।

योग: दुनियाभर में योग काफी लोकप्रिय है। संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को विश्व योग दिवस घोषित किया है। योग के बारे कहा जाता है कि यह भारतीय इतिहास के पूर्व-वैदिक काल से ही प्रचलन में था। इसकी जड़ें हमारी संस्कृति से जुडी हैं। अब ख़ुद को फिट रखने के लिए दुनियाभर में योग प्रचलन में आ गया है।

आयुर्वेद: दुनियाभर में आयुर्वेद को आत्मसात करने और उसकी व्याख्या देश दुनिया को हमने ही समझाई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने धन्वन्तरि जयंति को आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है।

जीरो: आज पूरी दुनिया में जीरो पॉपुलर है। बिना जीरो के आज सब कुछ असंभव है। ऐसे यह संख्या भारत की ही देन है। जीरो भारत ने ही इस दुनिया को दिया है।


सर्जरी: मोतियाबिंद और प्लास्टिक सर्जरी जैसी विधियां प्राचीन काल में भारत में की जा चुकी हैं। सर्जरी का मतलब है- ‘शरीर के किसी हिस्से को ठीक करना।’ भारत में सुश्रुत को पहला शल्य चिकित्सक माना जाता है। सुश्रुत प्रसव, मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज व अंग-भंग हो जाते थे या नाक खराब हो जाती थी, तो उन्हें ठीक करने का काम वे करते थे।

गणित: भारत में चिकित्सा, योग, खगोल, गणित आदि पर कई ग्रंथ लिखे जा चुके थे। इन क्षेत्रों की कई खोजे और परिकल्पनाओं पर काम हुआ है। करीब 1700 वर्ष पूर्व जन्मे आर्यभट्ट ने शून्य का आविष्कार कर दुनिया को काउंटिंग सिखाई थी। अंकगणित, ज्यामिति, बीजगणित, कैलकुलस आदि का शुभारंभ भी भारत में हुआ। शोधकर्ताओं का मानना है कि गणित में संख्याओं का अनुक्रम हेमचंद्र श्रेणी या फिबोनाची श्रेणी भी आधारित है।

रेडियो प्रसारण: सामान्य तौर पर नोबेल पुरस्कार विजेता इंजीनियर और खोजकर्ता गुलइलमो मार्कोनी को रेडियो प्रसारण का जनक माना जाता है। हालांकि भारतीय वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने इससे पहले मिलीमीटर रेंज रेडियो तरंग माइक्रोवेव का इस्तेमाल बारूद को सुलगाने और घंटी बजाने में किया था। इसके चार साल बाद लोहा-पारा-लोहा कोहिरर टेलिफ़ोन डिटेक्टर के तौर पर आया और यह वायरलेस रेडियो प्रसारण के आविष्कार का अग्रदूत बना।

फाइबर ऑप्टिक्स : जब इंटरनेट की दुनिया नहीं थी तो ये कई सारी चीज़ें संभव नहीं थीं। लेकिन फाइबर ऑप्टिक्स के आने बाद वेब, ट्रांसपोर्ट, टेलीफोन संचार और मेडिकल की दुनिया में क्रांतिकारी परिवर्तन आए। जो कि भारत की ही देन है। नरिंदर सिंह कपानी पंजाब के मोगा में जन्मे एक भौतिक विज्ञानी थे. दुनियाभर में इन्हें ऑप्टिक्स फाइबर का जनक माना जाता है।

सांप-सीढ़ी: आज के आधुनिक कंप्यूटर गेम्स को भारत के सांप-सीढ़ी खेल से प्रेरित कहा जाता है। इस खेल की उत्पति का संबंध बच्चों में मूल्यों को सिखाने के तौर पर देखा जाता है। 19वीं शताब्दी में यह औपनिवेशिक भारत में आया।

यूएसबी पोर्ट: यूनिवर्सल सीरियल बस पोर्ट के आविष्कार से हमें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से जुड़ने में मदद मिली। इससे उस शख्स की भी ज़िंदगी बदल गई जिसने इसे बनाने में मदद की। उस शख्स का नाम अजय भट्ट है। 1990 के दशक में भट्ट और उनकी टीम ने डिवाइस पर जब काम शुरू किया तो उस दशक के आख़िर तक कंप्यूटर कनेक्टिविटी के लिए यह सबसे अहम फीचर बन गया था।

शैम्पू : बिना शैम्पू के नहाना ऐसा लगता है मानो दोपहर बाद की चाय बिना बिस्कुट के हो। ऐसा लगता है कि बिना शैम्पू के कैसे नहाया जा सकता है। भारत में 15वीं शताब्दी में कई पौधों की पत्तियों और फलों के बीजों से शैम्पू बनाया जाता था। ब्रिटिश उपनिवेश काल में व्यापारियों ने यूरोप में इस शैम्पू को पहुंचाया।

Updated on:
13 Nov 2022 02:55 pm
Published on:
13 Nov 2022 02:51 pm
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