
जयपुर। मकर संक्रांति को सात दिन बाकी हैं, चारदीवारी और पुराने शहर में पतंगबाजी चरम पर पहुंच रही है, लेकिन इस बीच चायनीज मांझे से हादसे भी शुरू हो गए हैं। जयपुर में तीन दिनों में चायनीज मांझे से तीन हादसे हुए हैं। इनमें दो लोग घायल हुए हैं और ज्वैलर की मौत हो चुकी है। चायनीज मांझे से जयपुर शहर में ही पांच साल में करीब बारह लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें चार मासूम बच्चे भी शामिल हैं। इतना होने के बाद भी प्रशासन है कि अभी तक कार्रवाई का मन ही नहीं बना सका है, जबकि रामगंज स्थित पतंग बाजार में ऑन डिमांड चायनीज मांझा उपलब्ध है। जयपुर शहर में पिछले साल संक्रांति के समय पुलिस ने आधा दर्जन से भी ज्यादा कार्रवाई कर, तीन सौ से ज्यादा चायनीज रील बरामद की थीं।
बार-बार प्रयोग में आता है चाइनीज मांझा
पतंग कारोबारियों का कहना है कि चायनीज डोर सस्ती और पक्की होने के कारण ज्यादा बिकती है। डोर पर कांच और मैटल का इस तरह से लेप किया जाता है कि यह सूती मांझे से सस्ता पड़ता है। डोर आसानी से न तो टूटती है और न ही कटती है, यही कारण है कि एक बार खरीदने के बाद इसे लंबे समय तक काम में लिया जाता है। दुकानदारों की मानें तो चायनीज डोर की तीन रील की चरखी करीब दो सौ से तीन सौ रुपए में मिल रही है, वहीं सूती मांझे की ब्रांडेड डोर की तीन रील करीब चार सौ रुपए तक में मिलती है। सूती रील का मांझा एक बार प्रयोग में आने के बाद अक्सर दूसरी बार प्रयोग नहीं आता। जबकि चायनीज डोर को बार प्रयोग में लिया जा सकता है।
पहले नेपाल के रास्ते होती थी तस्करी
पुलिस प्रशासन की मानें तो करीब सात साल से जयपुर समेत अन्य कई राज्यों में चायनीज डोर की बिक्री हो रही है। लेकिन जब इस पर बैन लगा तो माल आना बंद हो गया। उसके बाद भी नेपाल के रास्ता चीन से माल आता रहा। सख्ती और ज्यादा हुई तो अब देश में ही कई राज्यों में इसे बनाया जाने लगा है। साल 2015 में दिसंबर में चेन्नई में तीन दिनों में चार बच्चों की मांझे से कटने से मौत होने के बाद स्थानीय पुलिस ने दो सौ लोगों को अरेस्ट किया था। पूछताछ में सामने आया था कि मांझा चेन्नई, बरेली, मुरादाबाद समेत देश के छह शहरों में बन रहा है और वहीं से पूरे देश में इसकी सप्लाई होती है। बताया जा रहा है कि अब जयपुर में भी गुपचुप तरीके से मांझा बनाया जाने लगा है।
इन राज्यों में बैन है मांझा
प्रदेश के कई राज्यों में तो चायनीज मांझे पर तो क्या किसी भी तरह के मांझे पर पूरी तरह से बैन हैं। इनमें पतंगबाजी के लिए मशहूर गुजरात समेत महाराष्ट्र, चंढीगढ़, दिल्ली जैसे राज्य शामिल हैं। इन कुछ राज्यों में सद्दे से पतंगबाजी की जाती है। चायनीज मांझा फिलहाल पूरे देश में ही बैन कर दिया गया है।
Updated on:
06 Jan 2018 12:31 pm
Published on:
06 Jan 2018 12:28 pm
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