
झुंझुनूं बीड़ में बनेगा चिंकारा अभयारण्य
झुंझुनूं शहर से सटे बीड़ में तालछापर जैसा चिंकारा अभयारण्य बनाने की शुरुआत हो गई है। इसके लिए करीब 27 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है। इस योजना में बीड़ का संरक्षण शामिल है और इससे सटे दो ऐतिहासिक जोहड़ का पुनरुद्धार भी करना है। इस सारी कवायद में पास ही बने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित होकर निकलने वाले साफ पानी की भी बड़ी भूमिका है। वन्य जीवों को निहारने के लिए बीड़ में तीन वॉच टॉवर बनाए जाएंगे। वन्य जीव प्रेमियों के विचरण के लिए करीब छह किलोमीटर लंबा वॉक वे बनाया जाएगा। पूरे बीड़ में बीस से ज्यादा पानी के स्पॉट बनाए गए हैं। तालछापर अभयारण्य की तर्ज पर बीड़ वन क्षेत्र हिरणों का स्थाई बसेरा बनाने के लिये अलसीसर. मलसीसर के निकट निवासरत हिरणों को बीड़ में छोड़ा जाएगा। इसके अलावा गीदड़, जरख एवं जंगली बिल्ली की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। बीड़ नीलगाय का निवास स्थल है।
हाईवे पर बनेंगे 4 अंडरपास
आपको बता दें कि इस बीड़ को सुरक्षित बनाने तथा इसे वन्यजीवों का विचरण स्थल बनाने के लिए लंबे समय से कवायद चल रही थी। पहले चरण में कुछ साल पहले इसे बीड़ झुंझुनूं कंजर्वेशन रिजर्व के रूप में संरक्षित किया गया था। अब वन विभाग ने यहां की वनस्पति, खासतौर पर विलुप्त होती जा रही प्रजाति के जाळ को बचाने और इसके विस्तार के लिए काम शुरू किया है। बीड़ नेशनल हाइवे पर सड़क के दोनों ओर फैला हुआ है। ऐसे में कोई जीव सड़क पार करते समय वाहनों की चपेट में न आ जाए, इसलिए इस हाइवे पर चार जगह अंडरपास बनाए जाएंगे। इसके साथ ही इस पूरे क्षेत्र की छह फीट ऊंची फेंसिंग भी की जा रही है। इससे बीड़ के दोनों हिस्सों में वन्य जीव सुरक्षित तरीके से आवाजाही कर सकेंगे। ऐसे ही दो अंडरपास सोती मार्ग पर भी बनाए जाएंगे।
लिया जा रहा है ग्रामीणों का सहयोग
आपको बता दें कि झुंझुनू.बगड़ मार्ग पर 1047.48 हैक्टेयर में फैले बीड़ वन क्षेत्र में मुख्यत नीलगाय एवं राष्ट्रीय पक्षी मोर बहुतायत में हैं। चिंकारा आने से यह वन्य क्षेत्र पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित होगा। विभाग चिंकारा के स्थाई बसेरा के लिए बीड़ में इस बार पेड़ों के साथ धामण घास, बेर, रोहिड़ा एवं खेजड़ी के पौधे मुख्य रूप से लगवा रहा है। धामण घास एवं बेर चिंकारा का मुख्य भोजन है। इसके लिए ग्रामीणों का भी काफी सहयोग लिया जा रहा है। इससे पहले बीड़ में पेड़ों की अवैध कटाई, अवैध खनन एवं शिकारियों पर लगाम लगाई गई है।
जोहड़ को भी करवाया जाएगा साफ
आपको यह भी बता दें कि बड़ी से ठीक पहले स्थित बाबा खेतानाथ आश्रम से सटा करीब 109 साल पुराना तुलस्यानों का जोहड़ अपनी मूल स्वरूप खो चुका है क्योंकि शहर से आने वाला गंदा पानी इसमें भर गया है। इसके कारण आश्रम की दीवारें भी गिरने के कगार पर हैं। इस जोहड़ का गंदा पानी पूरी तरह निकलवा कर इसमें सीवरेज प्लांट से शोधन के बाद निकलने वाला साफ पानी भरवाया जाएगा। इस रोड पर बगड़ के समीप स्थित एक पक्के जोहड़ को भी ठीक किया जाएगा। दोनों ही जोहड़ में साफ पानी भरवाया जाएगा और बारिश का पानी संग्रहित किया जाएगा।
कैफेटेरिया बनेगा, ग्रामीण उत्पाद मिलेंगे
इसी रोड पर स्थित वन विभाग की चौकी के समीप ही एक कैफेटेरिया विकसित करने की भी योजना है जो किसी स्वयं सहायता समूह को दिया जा सकता है। यहां स्वयं सहायता समूहों की ओर से गांवों में बनाए जाने वाली चमड़े की जूतियां, मुड्डे, अचार, फर्नीचर जैसे उत्पाद बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इस प्रोजेक्ट को लेकर उप वन संरक्षक झुंझुनूं राजेंद्र कुमार हुड्डा का कहना है कि बीड़ को संरक्षित करने, जोहड़ का पुनरुद्धार करवाने सहित बीड़ को विकसित करने के लिए 27 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बना कर सरकार को भेजा गया था, इसे मंजूरी मिल गई है। बीड़ को तालछापर के चिंकारा अभयारण्य की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
घायल पशु पक्षियों के लिए बनाया राहत केंद्र
बीड़ वन क्षेत्र में मौजूद वन विभाग के कार्यालय के निकट घायल पशु पक्षियों के उपचार के लिए राहत केंद्र बनाया गया है, जहां घायल जानवरों का प्राथमिक उपचार करके उनके भोजन का उचित प्रबंध किया जा रहा है। बुद्ध पूर्णिमा को हुई वन्य जीवों की गणना के अनुसार इस वर्ष चिंकारा की संख्या में 15 चिंकारा की बढ़ोतरी हुई है चिंकारा की संख्या का आंकड़ा बढ़कर 390 पाया गया। ब्यूरो रिपोर्ट पत्रिका टीवी
Published on:
15 Mar 2020 12:57 pm
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