
सर्वाइकल जैसी बीमारियों में कारगर है काइरोप्रैक्टिक
जयपुर। काइरोप्रैक्टिक एक ऐसी विधा, जिससे पश्चिमी देशों के लोग शायद अब मुखातिब हुए हैं, लेकिन भारत में यह विधा लंबे समय से प्रचलित है। पूर्व में इस विधा के जानकारों को आम बोलचाल में 'पहलवान' कहा जाता था। हालांकि, वे इलाज अनुभव के आधार पर करते थे और अब इसके लिए डिप्लोमा से लेकर डिग्री कोर्सेज होते हैं। हालांकि, ये कोर्स फिलहाल भारत में उपलब्ध नहीं हैं। काइरोप्रैक्टिक में हड्डियों से संबंधित समस्याओं को दूर किया जाता है। बशर्तें, बीमारी ऐसी स्टेज में न हो, जिसमें ऑपरेशन ही एकमात्र उपचार बचा हो। इस विधा की सक्सेस रेट अन्य किसी भी चिकित्सा पद्धति से काफी ज्यादा (70-80%) है। काइरोप्रैक्टिक से मेरुदंड (स्पाइनल कोर्ड) में उत्पन्न हुए विकारों को दूर किया जाता है। काइरोप्रैक्टिक भारत में अब विदेशों की तरह अपनी जड़ें जमा रही है।
किन बीमारियों में है कारगर
- Slip disk
- सर्वाइकल
- अर्थेराइटिस
- स्पाइनल कोर्ड से जुड़ी बीमारियों
किस उम्र के मरीज ज्यादा
यूं तो ३५ साल से ऊपर की महिलाओं में हड्डियों से संबंधित बीमारियां अधिक होती हैं, लेकिन वर्तमान में लगातार कम्प्यूटर पर काम करने, गलत पॉश्चर में बैठने आदि के कारण कम उम्र के मरीज भी सामने आ रहे हैं। इनमें आइटी कंपनी, कॉलसेंटर जैसी जगहों पर काम करने वाले काफी हैं। इनमें कमर के निचले हिस्से दर्द और सर्वाइकल की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है। गलत दिनचर्या बढ़ा रही है समस्याएं वर्तमान दौर में काम के चलते युवाओं को घंटे कम्प्यूटर के सामने बैठे रहना पड़ता है। ऐसे में स्पाइनल कोर्ड में धीरे-धीरे समस्याएं आना शुरू हो जाती है। घंटों लगातार बैठने के कारण सर्वाइकल और कमर के निचले हिस्से में दर्द रहने सहित अन्य परेशानियां ज्यादा बढ़ जाती हैं। साथ ही, गलत दिनचर्या और व्यायाम की कमी के चलते भी हड्डियों से जुड़ी बहुत ज्यादा बढ़ चुकी हैं।
शरीर के अंगों का बैठाया जाता है अलाइनमेंट
शरीर को सही रखने के लिए स्पाइनल कोर्ड का अलाइनमेंट होना बहुत जरूरी है। काइरोप्रैक्टिक में मेरुदंड से लेकर अन्य अंगों के अलाइनमेंट बैठाया जाता है। इस पद्धति में किसी भी प्रकार का साइड इफेक्ट नहीं है। देश में इसकी पढ़ाई नहीं होने के कारण फिजिशियन विदेशों से इस विधा में डिप्लोमा या डिग्री कर रहे हैं।
- डॉ. आशुतोष शर्मा, काइरोप्रैक्टिशनर एवं एसोसिएट प्रोफेसर जेएनयू अस्पताल और मेडिकल कॉलेज
Published on:
09 Aug 2023 12:46 am
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