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Chitra Navratri 2023 : इस बार अभिजीत मुहुर्त में नहीं होगी घट स्थापना, जानिए क्यों ?

ब्रह्म व शुक्ल योग के साथ बुधवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में नवरात्र की शुरुआत, घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त सुबह 6.33 से 7.40 बजे तक

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Chitra Navratri 2023 : इस बार अभिजीत मुहुर्त में नहीं होगी घट स्थापना, जानिए क्यों ?

Chitra Navratri 2023 : इस बार अभिजीत मुहुर्त में नहीं होगी घट स्थापना, जानिए क्यों ?

जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर 22 मार्च को भारतीय नव संवत्सर—2080 का आगाज होगा, इसी दिन ब्रह्म योग व शुक्ल योग के साथ बुधवार और उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में बसंत नवरात्र शुरू होंगे। सुबह 6 बजकर 33 मिनट से सुबह 7 बजकर 40 मिनट तक घट स्थापना का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त रहेगा। वहीं सुबह 11.14 बजे से दोपहर 12.10 बजे तक द्विस्वभाव लग्न में भी घर—घर घट स्थापना हेागी। इसके साथ ही दुर्गा माता की आराधना शुरू होगी। पूरे 9 दिन के नवरात्र रहेंगे, इन 9 दिनों में विशेष संयोग भी रहेंगे। हालांकि इस बार प्रतिपदा के दिन बुधवार होने से अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना नहीं होगी। दोपहर 12:10 बजे से 12:58 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

आमेर शिला माता मंदिर में प्रतिपदा पर सुबह 6.35 बजे घट स्थापना की जाएगी। सुबह 7.35 बजे मंदिर के पट खुलेंगे, इसकेे साथ ही भक्त मंदिर में माता रानी के दर्शन कर सकेंगे। मंदिर पुजारी बनवारी लाल शास्त्री ने बताया कि नवरात्र में रोजाना मंदिर सुबह 6 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक और शाम 4 से रात 8.30 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहेगा। 28 मार्च को सप्तमी पर निशा पूजन होगा। 29 मार्च को अष्टमी पर पूर्णाहुति होगी। 31 मार्च को दशमी पर नवरात्र उत्थापन होगा।

घट स्थापना के मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त — सुबह 06:33 से सुबह 07:40 बजे तक
द्विस्वभाव मिथुन लग्न — सुबह 11:14 से दोपहर 12:10 बजे तक
लाभ-अमृत का चौघड़िया — सुबह 6:33 से 9:33 बजे तक
शुभ का चौघडिया — सुबह 11:04 से दोपहर 12:10 बजे तक

वाल्मीकि रामायण के अखण्ड पारायण होंगे शुरू
श्री खोले के हनुमान मंदिर में सुबह 11.25 बजे घट स्थापना के साथ चैत्र नवरात्र उत्सव प्रारंभ होगा। श्री नरवर आश्रम सेवा समिति के महामंत्री बृजमोहन शर्मा ने बताया कि 22 मार्च को प्रात: 9 बजे 101 महिलाओं की ओर से मुरली मनोहरजी मंदिर बदनपुरा से खोले के हनुमान मंदिर तक कलश यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद सुबह 11.25 बजे मंत्रोच्चारण के साथ घट स्थापना व वाल्मीकि रामायण के अखण्ड पारायण शुरू होंगे। शाम 6 से रात 10 बजे तक 201 आसन पर सामूहिक नवाह्नपारायण के पाठ होंगे, जो प्रतिदिन आयोजित किए जाएंगे। समापन दशमी को सामूहिक सुंदरकांड पाठ के साथ होगा।

नवसंवत पंचांग का पूजन होगा
श्री आचार्य पीठ सरस निकुंज दरीबा पान में 22 मार्च को नवसवंत व दीक्षा महोत्सव आयोजित किया जाएगा। श्रीशुक पीठाचार्य अलबेली माधुरीशरण के सान्निध्य में नव संवत 2080 व आचार्य दीक्षा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। पहले दिन आचार्य महाप्रभु स्वामी श्याम चरण दास के लीला चरित्र व बधाईयों का गायन शाम 4 बजे से किया जाएगा। ठाकुर श्रीराधा सरस बिहारी जु सरकार की श्रृंगार झांकी दर्शन हेांगे। दीक्षा महोत्सव व नवसंवत पंचांग का पूजन किया जाएगा और ठाकुरजी को पंचांग श्रवण कराया जाएगा।