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चौमूं में 20 साल पहले आंवला मंडी के लिए खर्च कर दिए पांच करोड़, अब तक खुली ही नहीं

Chomu Amla Mandi: जयपुर जिले की चौमूं तहसील में 5 करोड़ की लागत से हाथनोदा में बनी आंवला मंडी पिछले 20 सालों से धूल फांक रही है। बजट सत्र में सरकार की ओर से छह माह में मंडी संचालन का वादा किए जाने से किसानों को उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक आंवले की खरीद-फरोख्त शुरू नहीं की गई है।
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जयपुर

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kamlesh sharma

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Updated: 21 Jun 2026, 2:40 PM IST

Chomu Amla Mandi

आंवला मंडी में पसरा सन्नाटा व बने प्लेटफार्म। फोटो पत्रिका

Chomu Amla Mandi : चौमूं। जयपुर जिले की चौमूं तहसील में 5 करोड़ की लागत से हाथनोदा में बनी आंवला मंडी पिछले 20 सालों से धूल फांक रही है। बजट सत्र में सरकार की ओर से छह माह में मंडी संचालन का वादा किए जाने से किसानों को उम्मीद जगी थी, लेकिन अभी तक आंवले की खरीद-फरोख्त शुरू नहीं की गई है। स्थिति यह है कि मंडी परिसर में सन्नाटा और जर्जर होती इमारतें इस बात की गवाही देती हैं कि योजना अब भी कागजों में ही सीमित है।

जानकारी के अनुसार हाथनोदा में वर्ष 2006-07 में 5 करोड़ रुपए की लागत से मंडी तैयार की गई थी, जो आज तक एक भी दिन चालू नहीं हुई। पिछले बजट सत्र में शाहपुरा विधायक मनीष यादव ने आंवला मंडी के बंद होने का मुद्दा उठाया। इस पर सरकार ने 6 महीने में मंडी संचालित करने का वादा किया, लेकिन अब तक आंवले की खरीद शुरू नहीं हो पाई। हालांकि फल-सब्जी मंडी समिति प्रशासन ने विभाग के दिशा निर्देशानुसार आंवला की खरीद-फरोख्त को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक आयोजित की और मंडी परिसर में साफ-सफाई भी करवाई है। साथ ही गार्ड भी नियुक्त किए, लेकिन आंवले की खरीद शुरू नहीं की।

16 बीघा में फैली मंडी में 54 दुकानें

जानकारी के अनुसार आंवला मंडी तकरीबन 16 बीघा में फैली हुई है। इस मंडी में 54 दुकानें, गोदाम और प्रोसेसिंग यूनिट्स भी है, लेकिन प्रशासन की उदासिनता के चलते किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और चौमूं के आंवले को अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, इंग्लैंड और पोलैंड जैसे देशों तक पहुंचाने का सपना अभी तक अधूरा है। आज मंडी के प्लेटफॉर्म जर्जर हो चुके हैं, गेट-खिड़कियां टूट चुकी हैं, बोरिंग और सीडब्लूआर टंकी बेकार पड़ी है।

350 हेक्टेयर में खेती, सीजन में 1,075 टन उत्पादन

चौमूं क्षेत्र के 11 गांवों आलीसर, सामोद, कुशलपुरा, फतेहपुरा समेत में करीब 350 हेक्टेयर में आंवले की खेती होती है और हर सीजन में 1,075 टन उत्पादन निकलता है। यह माल दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश और बेंगलुरु तक जाता है, लेकिन किसानों को उचित दाम के लिए निजी व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता है।

प्रोसेसिंग इकाई भी दरकार

किसानों ने बताया कि मंडी चालू होने का सालों से इंतजार है। बडे पैमाने पर खेती और उत्पादन होने के बादवूज मंडी चालू नहीं हो पा रही है। किसान मंडी चालू करने के साथ ही आंवला प्रोसेसिंग इकाई चालू करवाई जाए तो उन्हें उनके उत्पादन का उचित मूल्य मिल सके। प्रोसेसिंग इकाई से आंवले से पाउडर, मुरब्बा और जूस जैसे उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

इनका कहना है

आंवला मंडी संचालन को लेकर व्यापारियों के साथ बैठक कर चर्चा की गई है। आगे के सीजन में चालू करने का पूरा प्रयास है। मंडी में साफ-सफाई कराकर गार्ड भी नियुक्त किए हैं। कई व्यापारियों ने मंडी में बिल्व का व्यापार भी किया है। हालांकि इस सीजन में आंवला की खरीद शुरू नहीं हुई है।
देवाशीष कौशिक, सचिव, फल सब्जी मंडी समिति चौमूं।