13 मई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

City event- दो भाषाओं में महात्मा गांधी को काव्यमयी श्रद्धांजलि

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से तीन अक्टूबर को 'महात्मा गांधी और शायरी' मुशायरा का मंचन किया गया। रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में प्रस्तुत होने वाले नाटक का लेखन और निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ.एम सईद आलम ने किया।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Rakhi Hajela

Oct 03, 2021

City event- दो भाषाओं में महात्मा गांधी को काव्यमयी श्रद्धांजलि

City event- दो भाषाओं में महात्मा गांधी को काव्यमयी श्रद्धांजलि


रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में 'उर्दू ड्रामा महात्मा गांधी और शायरी का मंचन
जयपुर। आजादी का अमृत महोत्सव के तहत राजस्थान उर्दू अकादमी की ओर से तीन अक्टूबर को 'महात्मा गांधी और शायरी' मुशायरा का मंचन किया गया। रवीन्द्र मंच के मुख्य सभागार में प्रस्तुत होने वाले नाटक का लेखन और निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ.एम सईद आलम ने किया। प्रस्तुति के दौरान संभागीय आयुक्त और अकादमी के प्रशासक दिनेश कुमार यादव, आमेर विकास एवं प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक राजनारायण शर्मा, प्रसिद्ध गजल गायक मोहम्मद हुसैन अहमद हुसैन,मशहूर शायर लोकेश कुमार सिंह साहिल मौजूद रहे। मंच संचालन डॉ.रत्ना शर्मा ने किया।
अकादमी के सचिव मोअज्जम अली ने बताया कि दिल्ली के पेरोज ट्रूप की ओर से प्रस्तुत नाटक उर्दू और हिंदी कविता में गांधी दर्शन पर आधारित रहा। ये नाटक दो भाषाओं में गांधीजी को एक काव्यमयी श्रद्धांजलि है।

समकालीन कवियों ने सजाई महफिल
नाटक में दर्शाया गया कि इस काल्पनिक मुशायरे में ये सभी शायर व कवि 2 अक्टूबर के अवसर पर परलोक में एकत्रित हुए। मुशायरे का संचालन उर्दू के प्रसिद्ध हास्य.कवि और गांधी.भक्त अकबर इलाहाबादी करते हैं। नाटक में बताया गया कि अकबर इलाहाबादी ने महात्मा गांधी के शुरुआती दौर में ही उन पर पूरा का पूरा एक काव्य संग्रह गांधीनामा लिख दिया था,वहीं चकबस्त ने 1914 में ही गांधी पर एक कविता लिख दी थी। नाटक में केवल कवि ही नहीं बल्कि गांधीजी के संगी.साथियों को भी दिखाया गया। वे कवि थे, जिन्होंने गांधीजी से प्रेरणा हासिल कर साहित्य और सियासत के क्षेत्र में कदम रखा। जिनमें मैथिली शरण गुप्त, सुभद्रा कुमारी, महादेवी, मजाज शामिल थे। नाटक की एक बहुत बड़ी खूबी यह भी रही कि यह मौजूदा दौर के दर्शकों को उन प्रसिद्ध कवियों से रूबरू करवाता हैए जो अब हमारे बीच नहीं हैं।
इन कलाकारों ने किया अभिनय
नाटक में एम सईद आलम, राहुल पासवान, आरिफा नूरी के अलावा दुष्यंत कुमार, राहुल बंसल, सुभद्रा कुमारी चौहान,मोहम्मद जुल्फिकार, निधि कुमारी, प्रिंस कुमार, पुरुषोत्तम प्रतीक, सत्यम झा, सुमित भारद्वाज, संकेत गोजा सहित कई कलाकारों ने अभिनय किया।