
मियावाकी तकनीक से होगा कुछ ऐसा कि पिंकसिटी के उसी इलाके में जाएंगे बार बार
जयपुर। शहर का सिटी पार्क चर्चा में है और उसके साथ ही बात हो रही है जापानी तकनीक मियावाकी की। दरअसल इस तकनीक से ही पार्क खूबसूरत बनेगा और हरा भरा भी। मियावाकी तकनीक बेहद खास है। इससे वाकई में पार्क की रंगत बदल जाएगी। जापानी तकनीक से सिटी पार्क में ऑक्सीजोन पॉकेट्स बनाए जा रहे हैं।
वनीकरण का यह एक जापानी तरीका है। इसमें पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है। इस पद्धति में कई अलग-अलग प्रजातियों के पौधे एक दूसरे के पास में लगाए जाते हैं। इसमें एक पेड़ ऊंचाई वाला, दूसरा कम ऊंचाई वाला और तीसरा घनी छायादार पौधा चुना जाता है। जापान की मियावाकी तकनीक से सघन वन विकसित किए जाते हैं। इस पद्धति में मुख्य रूप से झाड़ी छोटे पेड़, पेड़ और कैनोपी प्रकार के पौधे लगाए जाते हैं।
कम जगह में लगे घने पौधे ऑक्सीजन बैंक की तरह काम करते हैं। मियावाकी पद्धति के माध्यम से एक जंगल को केवल दो से तीन वर्षों में विकसित किया जा सकता है, जबकि पारंपरिक पद्धति से इसमें कम से कम 20 से 30 वर्ष लगते हैं।
साइंस जर्नल के एक शोध के मुताबिक इस तकनीक की मदद से तेजी से जंगल तैयार किए जा सकते हैं, जो बेहद ज़रूरी हैं। 40 साल पहले जापान के अकीरा मियावाकी ने मियावाकी जंगल की खोज की थी। इसलिए इनको मियावाकी जंगल कहा जाता है।
Published on:
04 Mar 2023 03:30 pm
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