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Climate Change: 78 साल में तीन फीट डूबेंगे 12 भारतीय तटीय शहर

जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघलते ग्लेशियर दुनिया के साथ—साथ भारत के लिए भी बड़ी मुश्किल बनते जा रहे हैं। आने वाले साल में जिस तेजी से समुद्र का पानी बढ़ेगा, उससे भारतीय तटीय शहरों के डूबने का खतरा पैदा हो जाएगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की 'स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट इन—2021 रिपोर्ट ने कहा है कि भारतीय तटीय इलाकों में तेजी से पानी बढ़ रहा है और 2100 तक 12 भारतीय शहरों में समुद्र का जलस्तर तीन फीट बढ़ जाएगा। यानी पानी शहर के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा।

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जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघलते ग्लेशियर दुनिया के साथ—साथ भारत के लिए भी बड़ी मुश्किल बनते जा रहे हैं। आने वाले साल में जिस तेजी से समुद्र का पानी बढ़ेगा, उससे भारतीय तटीय शहरों के डूबने का खतरा पैदा हो जाएगा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की 'स्टेट ऑफ द ग्लोबल क्लाइमेट इन—2021 रिपोर्ट ने कहा है कि भारतीय तटीय इलाकों में तेजी से पानी बढ़ रहा है और 2100 तक 12 भारतीय शहरों में समुद्र का जलस्तर तीन फीट बढ़ जाएगा। यानी पानी शहर के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा।

आठ साल में सालाना वृद्धि दर 4.5 मिमी

हाल में जारी यह रिपोर्ट कहती है, सभी भारतीय तटों से जुड़े समुद्र का स्तर दुनिया के मुकाबले तेजी से बढ़ रहा है। विश्व स्तर पर वर्ष 2013-2021 के बीच समुद्र के स्तर में वृद्धि की दर 4.5 मिलीमीटर प्रति वर्ष थी, जो 1993-2002 की तुलना में दोगुनी है। समुद्र के स्तर में वृद्धि का प्रमुख कारण आर्कटिक और अंटार्कटिक क्षेत्रों में बर्फ की चादरों का तेजी से पिघलना है। 'ला नीना' की घटनाएं 2021 के शुरुआत से लेकर अंत तक जारी थी। इसके बावजूद बर्फ का पिघलना जारी रहा। ला नीना सामान्य से अधिक ठंडा चरण है, जिसमें समुद्र का स्तर औसत से कम रहता है।

मुश्किल में आएंगे भारतीय इलाके
रिपोर्ट के अनुसार 2100 में भारत के 12 तटीय शहर करीब तीन फीट पानी में डूब जाएंगे। पश्चिम बंगाल का किडरोपोर इलाका जहां बीते साल तक समुद्री जलस्तर के बढऩे का कोई खतरा महसूस नहीं हो रहा था, वहां 2100 तक आधा फीट पानी बढ़ जाएगा। इन तटीय इलाकों में कई स्थानों पर प्रमुख बंदरगाह, व्यापारिक केंद्र, मछलियों और तेल के कारोबार है। समुद्री जलस्तर बढऩे से आर्थिक व्यवस्था को बढ़ा नुकसान होगा।

संकट में बंगाल का सुंदरवन डेल्टा
2020 के चक्रवात अम्फान के कारण समुद्र का पानी 25 किलोमीटर अंदर तक प्रवेश कर गया था। इससे सुंदरवन डेल्टा के बड़े हिस्से में पानी भर गया। भारतीय मौसम विभाग, पुणे के अनुसार औसत हर 1.67 साल में एक चक्रवाती तूफान सुंदरवन से टकराता है। नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन के लैंडसैट सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार दो दशक में सुंदरवन डेल्टा में समुद्र का स्तर 30 मिमी प्रति वर्ष की दर से बढ़ा है। इसमें तटरेखा में 12 प्रतिशत की कमी आई है। यह वैश्विक औसत से छह गुना अधिक है। इससे पहले ही डेल्टा से लगभग 15 लाख लोगों का विस्थापन हो चुका है।

वर्ष 2100 तक ऐसे बढ़ेगा खतरा
भारतीय शहर पानी का स्तर बढ़ेगा
1 - भावनगर - 2.69
2 - कोच्चि - 2.32
3 - मोरमुगाओ - 2.06
4 - ओखा - 1.09
5 - तूतीकोरिन - 1.93
6 - पारादीप - 1.93
7 - मुंबई - 1.90
8 - मैंगलोर - 1.87
9 - विशाखापट्टनम - 1.77
(सभी आंकड़े फीट में)


ये देश भी सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
— यूनियन ऑफ कंसर्नड साइंटिस्ट्स (यूसीएस) के अनुसार मालदीव 1,200 छोटे प्रवाल द्वीपों से बना है और लगभग 5,40,000 लोगों का घर है। यह पृथ्वी पर सबसे समतल देश है, जिसकी औसत ऊंचाई सिर्फ 3 फीट (1 मीटर) है। मालदीव केवल 1.5 फीट (45 सेमी) के क्रम में समुद्र के स्तर में वृद्धि का अनुभव करता है, तो वह 2100 तक अपने भूमि क्षेत्र का लगभग 77 फीसदी खो देगा।

— किरिबाती समुद्र तल से लगभग 6 फीट (1.8 मीटर) है। 1.2 लाख की आबादी वाले इस द्वीप पर समुद्र का स्तर 3 फीट बढ़ जाता है तो यह अपनी दो-तिहाई भूमि खो सकता है।

— साल 2100 तक चीन सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला देश होगा, यहां 4.3 करोड़ लोग तटीय इलाकों में हैं। वहीं, बांग्लादेश में 3.2 करोड़ लोग प्रभावित होंगे, जबकि भारत में 2.7 करोड़ लोग प्रभावित होंगे। नाइजीरिया और बैंकॉक, थाईलैंड को भी बड़ा नुकसान उठाना होगा।