
किसान की प्रतीकात्मक तस्वीर: पत्रिका
Natural Farming: जयपुर. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार किसानों के सशक्तीकरण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर ठोस कदम उठा रही है। प्राकृतिक खेती को राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती देना है।
वर्ष 2025-26 के बजट में प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए व्यापक कार्ययोजना घोषित की गई है। इसके अंतर्गत प्रदेश के 2 लाख 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 2.25 लाख किसानों को केंद्र सरकार द्वारा 60 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 40 प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जा रही है, जबकि अतिरिक्त 25 हजार किसानों को राज्य सरकार द्वारा शत-प्रतिशत सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को संगठित रूप देने के लिए प्रत्येक 50 हेक्टेयर क्षेत्र में 125 किसानों का एक कलस्टर बनाया गया है। पूरे राज्य में 2,000 कलस्टर विकसित किए जा चुके हैं, जो लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हैं। किसानों को आधुनिक तकनीकों और जैविक पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कृषि सखी और मास्टर ट्रेनरों की मदद से किसानों को निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन मिल रहा है।
किसानों को प्रति एकड़ 4,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से दी जा रही है। इसके अलावा प्राकृतिक उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं। प्रत्येक केंद्र पर 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर जैविक खाद का निर्माण संभव हो सके। यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक सिद्ध हो रही है।
| क्रमांक | उपलब्धि का विवरण | आंकड़े / जानकारी |
|---|---|---|
| 1 | प्राकृतिक खेती से जुड़े किसान | 2.50 लाख किसान |
| 2 | विकसित कलस्टर | 2,000 कलस्टर |
| 3 | कवर किया गया क्षेत्र | 1 लाख हेक्टेयर |
| 4 | प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि | ₹4,000 |
| क्रमांक | विवरण | जानकारी |
|---|---|---|
| 1 | स्थापित केंद्रों की संख्या | 180 केंद्र |
| 2 | प्रति केंद्र वित्तीय प्रावधान | ₹1 लाख |
| 3 | उपलब्ध सुविधा | स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक |
| 4 | किसानों को लाभ | खेती की लागत में कमी |
Published on:
24 Jan 2026 10:21 pm

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