
फुटवियर उद्योग पर छाए संकट के बादल, 12 फीसदी जीएसटी का भारी विरोध
मकान और कपड़ें की तरह फुटवियर भी एक आवश्यक वस्तु है, जिसके बिना कोई घर से बाहर नहीं निकल सकता है। इसमें बड़ी आबादी घर में काम करने वाली महिलाएं, मजदूर, छात्र एवं आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न वर्ग के लोग शामिल हैं। लेकिन, जीएसटी दरों में विसंगतियों के कारण अब ये फुटवियर आम आदमी की पहुंच से दूर हो रहे है। दूसरी तरफ, छोटे फुटवियर उद्योगों के अस्तित्व पर भी संकट गहरा गया है। गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी की दरें 7 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दी थी। फुटवियर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार असवानी ने कहा कि फुटवियर पर जीएसटी बढ़ाना न्यायोचित नहीं है। हमने सरकार से आग्रह किया है कि इसे पूर्व की भांति 5 फीसदी ही रखा जाना चाहिए।
60 फीसदी आबादी 250 रुपए से कम के पहनती फुटवियर
देश की 60 फीसदी आबादी 30 रुपए से लेकर 250 रुपए की कीमत के फुटवियर पहनती है। वहीं, लगभग 15 फीसदी आबादी 250 से 500 रुपए की कीमत के फुटवियर का इस्तेमाल करती है और 10 फीसदी लोग 500 से 1000 रुपए तक के जूते का उपयोग करते हैं। शेष 15 फीसदी लोग बड़ी फुटवियर कंपनियों अथवा आयातित ब्रांडों द्वारा निर्मित अच्छी गुणवत्ता वाली चप्पल, सैंडल या जूते खरीदते हैं।
Published on:
05 May 2023 03:51 pm

बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
