
Gehlot-Pilot: पायलट के प्रभाव वाले क्षेत्र में 35 दिन में तीसरी बार मुख्यमंत्री गहलोत
जबलपुर/जयपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 50 प्रतिशत से अधिक जाति आधारित आरक्षण पर रोक लगाने से राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने की कवायद को झटका लग सकता है। दरअसल, एमपी में पिछड़ा वर्ग आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत कर दिए जाने से आरक्षण 63 प्रतिशत हो गया था, जिसमें आर्थिक पिछड़ा वर्ग का 10 प्रतिशत आरक्षण शामिल नहीं है।
राजस्थान में वर्तमान में आर्थिक पिछड़ा वर्ग के लिए 10 और जातियों के पिछड़ेपन के आधार पर 54 प्रतिशत आरक्षण है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने जातियों के पिछड़ेपन पर आधारित आरक्षण को लेकर स्पष्ट किया है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
न्यायाधीश शील नागू और न्यायाधीश अमरनाथ केसरवानी की खंडपीठ ने यूथ फॉर इक्वेलिटी संगठन की याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया। याचिका में कहा, राज्य सरकार ने सितम्बर 2021 में सर्कुलर जारी कर कहा कि राज्य या उसके संबद्ध निकायों की प्रक्रियाधीन भर्तियों पर 50 प्रतिशत अधिकतम आरक्षण की सीमा लागू नहीं रहेगी।
6% आरक्षण बढ़ाने की घोषणा की थी
मुख्यमंत्री अशोेक गहलोत ने 9 अगस्त को बांसवाड़ा जिले के मानगढ़ धाम में वर्तमान में जारी अन्य पिछड़ा वर्ग के 21 फीसदी आरक्षण को 6 फीसदी बढ़ाकर उसे इस वर्ग की अति पिछड़ी जातियों के लिए रिजर्व करने की घोषणा की थी।
आरक्षण बढ़ाया तो कानून सम्मत नहीं होगा
'जाति आधारित आरक्षण 50% से अधिक नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट भी यह कह चुका है। आर्थिक पिछड़ा वर्ग का आरक्षण वर्टिकल है। राजस्थान में जाति आधारित आरक्षण 54% हो गया है, जबकि यह 50% से अधिक नहीं हो सकता। अगर आरक्षण और बढ़ाया जाएगा, तो वह भी कानून सम्मत नहीं होगा।' आरएन माथुर, वरिष्ठ अधिवक्ता, राजस्थान हाईकोर्ट
Published on:
15 Aug 2023 02:47 pm
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