महत्ता और गुणवत्ता विषय पर हुआ नारी विमर्श
संस्कृत अकादमी के माघ महोत्सव के तहत विभिन्न क्षेत्रों की 21 महिलाओं ने की नारी के सर्वांगीण विकास पर चर्चा
जयपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत राजस्थान संस्कृत अकादमी और कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित किए जा रहे एक महीने के माघ महोत्सव के तहत मंगलवार को ग्लोबल इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलॉजी सीतापुरा के ऑडिटोरियम में एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय संस्कृति-संस्कार के आलोक में नारी की सार्वभौतिक सत्ता, महत्ता और गुणवत्ता रहा। इसमें विभिन्न क्षेत्रों से आईं 21 महिलाओं ने इस विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। जयपुर नगर निगम हैरीटेज की महापौर मुनेश गुर्जर समारोह की मुख्य अतिथि थीं। मुनेश ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम महिला अधिकार के रूप में महिला को टिकट खिडकी पर नंबर एक पर लगने के अधिकार की पैरवी नहीं करते। मैं हमेशा महिलाओं के सर्वांगीण विकास की बात करती हूं, मैं चाहती हूं कि हर महिला दो महिलाओं की जिम्मेदारी ले कि उन्हें आगे लाना है। उन्होंने कहा कि मेरे घर के दरवाजे महिलाओं के लिए 24 घंटे खुले हैं मुझे खुशी होगी कि मैं किसी महिला के काम आ सकूं। इस मौके पर कला एवं संस्कृति विभाग के संयुक्त शासन सचिव पंकज ओझा ने वेदों, पुराणों, उपनिषदों और तंत्र शास्त्र के माध्यम से नारी की महत्ता को स्पष्ट किया।
समकालीन है संस्कृति
विषय प्रवर्ततन करते हुए पूर्वा भट्ट ने कहा कि जब भी संस्कृति की बात चलती है तो हम भूतकाल में चले जाते हैं जो कि सही नहीं है। दरअसल संस्कृति हमेशा से समकालीन रही है ये परिवर्तित होकर बहने वाली धारा के समान है। जयपुर की पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल ने संगोष्ठी में महिला दिवस मनाए जाने के औचित्य पर उठे सवाल का जवाब देते हुए कहा कि हम दीपक रोज जलाते हैं और नमाज रोज अता करते हैं तो फिर क्यों दिवाली पर सैकड़ों दीपक जलाते हैं या जुम्मे पर विशेष नमाज करते हैं। भले ही स्त्री विमर्श हर रोज होता हो लेकिन उसे एक दिन उत्सव के रूप में मनाना अच्छी बात है। वनस्थली विद्यापीठ की कुलपति प्रोत्र इना शास्त्री ने कहा कि स्त्री है तो सृष्टि, सृष्टि है तो संस्कृति और संस्कृति है तो संस्कार हैं। संगोष्ठी को राजस्थान संस्कृत अकादमी के निदेशक संजय झाला ने भी संबोधित किया और संस्कृति.संस्कार के आलोक में नारी की सार्वभौतिक सत्ताए महत्ता और गुणवत्ता की बेहतरीन व्याख्या से वहां मौजूद लोगों की जमकर दाद बटोरी। स
कल माघ मंथन पर अन्तरराष्ट्रीय आभासी सम्मेलन
समारोह के तहत बुधवार को एक अन्तरराष्ट्रीय आभासी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा जिसमें भारत सहित नेपाल, इंटोनेशिया, रशिया और श्रीलंका के विद्वान महाकवि माघ के कृतित्व और व्यक्ति पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। इसे शाम 6.30 बजे से अकादमी के यू ट्यूब और फेसबुक लिंक के जरिए देखा जा सकता है।