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संपादकीय: नई चेतना, नए संकल्प और उम्मीदों का सवेरा

वर्ष 2025 का विदा होना और नए साल का स्वागत, भारत के लिए उम्मीदों, संभावनाओं और संकल्पों से भरा क्षण है। बीता वर्ष वैश्विक स्तर पर अस्थिरताओं से भरा रहा।

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जयपुर

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ANUJ SHARMA

Jan 01, 2026

नववर्ष केवल कैलेंडर बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। जब हम एक नए वर्ष में प्रवेश करते हैं, तो बीते समय की उपलब्धियां हमें गर्व से भर देती हैं और अधूरे सपने हमें आगे बढऩे की प्रेरणा देते हैं। वर्ष 2025 का विदा होना और नए साल का स्वागत, भारत के लिए उम्मीदों, संभावनाओं और संकल्पों से भरा क्षण है। बीता वर्ष वैश्विक स्तर पर अस्थिरताओं से भरा रहा। युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति शृंखला में बाधाएं और आर्थिक अनिश्चितता ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। इसके बावजूद भारत ने आत्मविश्वास और संतुलन के साथ अपनी विकास यात्रा जारी रखी।

विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में भारत की तेजी से बढ़ती उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि सही नीतियां, दूरदर्शी नेतृत्व और जनभागीदारी मिलकर असंभव को भी संभव बना सकती हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठे। स्वदेशी हथियार निर्माण, आधुनिक तकनीक का विकास और रणनीतिक साझेदारियों ने भारत की सुरक्षा को नई मजबूती दी। ऊर्जा क्षेत्र में नवीकरणीय स्रोतों पर बढ़ता जोर, हरित हाइड्रोजन जैसी पहलों ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए ठोस आधार तैयार किया। वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुफ्त राशन और स्वास्थ्य बीमा जैसी योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में स्थायित्व और सम्मान का भाव जोड़ा। युवाओं की ऊर्जा, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और तकनीक आधारित नवाचार देश की प्रगति को नई गति दे रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर भी भारत ने संतुलित और सशक्त भूमिका निभाई। पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक शक्तियों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद भारत ने संवाद, सहयोग और शांति का मार्ग चुना।

वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को आगे बढ़ाते हुए भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी विश्वसनीयता को और मजबूत किया। हालांकि यह मान लेना कि चुनौतियां समाप्त हो गई हैं, आत्मसंतोष होगा। बेरोजगारी, शिक्षा की गुणवत्ता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक असमानता जैसे मुद्दे आज भी हमारे सामने खड़े हैं। जैसा कि कवि रॉबर्ट फ्रॉस्ट ने कहा था, मीलों चलना अभी बाकी है। यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि विकास की राह सतत प्रयास मांगती है। नया वर्ष हमें यह अवसर देता है कि हम बीते अनुभवों से सीखें, अपनी कमियों को स्वीकार करें और भविष्य के लिए ठोस संकल्प लें। यह समय है जब सरकार, समाज और नागरिक मिलकर विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ें। हम अपने कर्तव्यों को समझें और राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनें। नए सवेरे, नई उम्मीदों और नए संकल्पों के साथ यदि हम एकजुट होकर आगे बढ़े, तो वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया का नेतृत्व करेंगे।