
CBSE पत्रिका-फोटी
जयपुर: राजधानी जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल से सीबीएसई ने मान्यता वापस ले ली है। साथ ही आदेश दिया है कि इस सत्र के खत्म होने के बाद कक्षा 9 और 11 के सभी बच्चे दूसरे सीबीएसई स्कूलों में जाएंगे। इस आदेश के ठीक एक दिन बाद अजमेर में सीबीएसई के क्षेत्रीय कार्यालय ने बुधवार को कहा कि वे बच्चों को समीप के दूसरे स्कूल में शिफ्ट करें।
अधिकारी ने बताया कि पास के स्कूलों में कितनी सीटें खाली हैं, इसकी जांच की जाएगी और उसी के हिसाब से बच्चों को वहां भेजा जाएगा। सभी बच्चों को पास के स्कूलों में भेजा जाएगा। बोर्ड खुद दाखिले की सारी प्रक्रिया संभालेगा। हम पूरा ध्यान रखेंगे कि बच्चों का स्कूल बदलना आसान हो और वे जो विषय पढ़ रहे हैं, वही विषय उन्हें नए स्कूल में मिलें, ताकि उन्हें कोई दिक्कत न आए।
स्कूल की चौथी मंजिल की रेलिंग से गिरकर जान गंवाने वाली छात्रा अमायरा के माता-पिता ने सीबीएसई के फैसले का स्वागत किया। लेकिन उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया, इसलिए वे पूरी तरह खुश नहीं हैं।
छात्रा अमायरा के पिता विजय मीणा और उनकी पत्नी शिवानी ने कोटा में बुधवार को मांग की कि स्कूल की ऊपरी प्राइमरी कक्षाओं की भी मान्यता वापस ली जाए। साथ ही प्रिंसिपल और जिम्मेदार शिक्षकों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज होना चाहिए। इस तरह की इतनी बड़ी दुखद घटना हुई, फिर भी राज्य सरकार ने खुद कुछ नहीं किया।
नीरजा मोदी स्कूल की प्रिंसिपल इंदु दुबे ने सीबीएसई की कार्रवाई को बहुत सख्त बताया। उन्होंने कहा कि सीबीएसई का ये फैसला बहुत अफसोसजनक है और खासकर कक्षा 9 से 12 के बच्चों के लिए बहुत सख्त है। क्योंकि वे अपने करियर के बहुत जरूरी मोड़ पर हैं। हम अपने बच्चों की पढ़ाई के हित के लिए पूरी तरह समर्पित हैं और सभी नियमों के अनुसार उनकी सुरक्षा का पूरा ध्यान रखेंगे। उन्होंने आगे कहा कि स्कूल की सबसे बड़ी प्राथमिकता सिर्फ बच्चे हैं और हम उनके हित बचाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव कृष्णा कुनाल ने कहा, माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने स्कूल को नोटिस भेज दिया है और 6 जनवरी को बैठक रखी गई है। इस बैठक में स्कूल को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। स्कूल की बात सुनने के बाद सही कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा अभिभावकों का संगठन संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा कि सीबीएसई का यह फैसला उन सभी निजी स्कूलों के लिए चेतावनी है, जो बच्चों की सुरक्षा के साथ लापरवाही करते हैं।
Updated on:
01 Jan 2026 06:49 pm
Published on:
01 Jan 2026 12:54 pm
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