
जयपुर। छोटे जिले होने से जिला मुख्यालय से गांवों और कस्बों की दूरियां घटेंगी, वहीं प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद बढ़ेगा। कलक्टर, एडीएम सहित सरकारी मशीनरी की रफ्तार भी तेज होगी। सभी की मुख्यालयों तक पहुंच के साथ सड़क, पानी, बिजली, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा। औद्योगिक विकास तेज होगा। चुनावी साल होने के कारण नए जिलों की बजट घोषणा को अमलीजामा पहनाना भी जरूरी है।
तेज सर्विस का मिलेगा लाभ
अधिकारियों के अनुसार फास्ट सर्विस डिलीवरी छोटे जिलों से ही संभव है। जिले का दायरा बड़ा होता है तो जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए ही जनता को 150-200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। छोटे जिले होते हैं तो प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर निगरानी बनी रहती है। दूर-दराज गांवों तक के लोगों को जिला मुख्यालय पर बैठे अफसरों तक पहुंचने में आसानी रहती है। जिलों का आकार छोटा होने से प्लानिंग उतनी ही कारगर होगी। गांव, पंचायत, ब्लॉक और जिला मुख्यालय का सीधा संवाद होगा। विकास की रफ्तार तेज, कानून और व्यवस्था बेहतर, कनेक्टिविटी बढ़ेगी, सरकारी योजनाओं को आम लोगों तक ज्यादा आसानी से पहुंचाया जा सकेगा, राजस्व भी बढ़ेगा।
बजट में कोटपूतली बहरोड़ जिला घोषित होने के बाद नया जिला बनाने की अधिसूचना जारी होने और सीमाएं तय करने के बाद प्रशासनिक कार्यालय, पुलिस स्टेशन, स्कूल और अन्य आवश्यक सेवाएं और जन सुविधाओं से जुड़े कार्यालय शुरू किए जाएंगे। पहले चरण में जिला कलक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला परिषद के कार्यकारी अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी व एसई पीडब्ल्यूडी के कार्यालय वैकल्पिक भवनों में शुरू होंगे।
इसके अलावा 70 से 80 दूसरे जिला स्तरीय कार्यालय शुरू होेंगे। ये दो से तीन साल में शुरू होंगे। जिला मुख्यालय, मिनी सचिवालय व पुलिस लाइन के लिए कालूहेड़ा में जमीन आवंटित हो गई है, लेकिन आवंटित जमीन पर भवन निर्माण के लिए बजट स्वीकृत होने व टैण्डर प्रक्रिया सहित निर्माण में समय लगेगा। नए जिले पर 500 से 700 अधिकारी एवं कर्मचारी जिले के प्रशासनिक एवं अन्य विभागों के संचालन के लिए जरूरी हैं। नए जिले में अधिकारी एवं कर्मचारियों को आवास सुविधा के लिए भवनों की भी जरूरत होगी।
Published on:
05 May 2023 03:52 pm
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