
विकास जैन
जयपुर। सड़क हादसे के घायलों को नजदीक के अस्पताल पहुंचाने वालों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री चिरंजीवी जीवन रक्षक योजना का हाल भी मिलावट की सूचना देने पर 51 हजार रुपए इनामी राशि जैसा ही हो रहा है। योजना को लागू हुए करीब एक साल होने को है, लेकिन जटिल सरकारी प्रक्रिया के चलते राज्य की सवा सात करोड़ आबादी में ही महज 21 लोगों को ही भले आदमी का तमगा मिला है।
अभी तक इस योजना के सभी प्रस्ताव मुख्यालय पर आ रहे थे। योजना में कम लाभार्थियों का बड़ा कारण 108 एम्बुलेंस से कोई मरीज को लाता है तो उस स्थिति में किसी को भी प्रोत्साहन राशि नहीं दी जा रही है। दुर्घटनाओं में अधिकांश मामले ऐसे होते है, जहां 108 एम्बुलेंस से ही मरीज अस्पताल लाए जाते है। गौरतलब है कि अनदेखी के चलते मिलावट पर 51 हजार रुपए राशि को अभी तक वित्तीय स्वीकृति ही नहीं मिली है। राजस्थान पत्रिका ने पिछले दिनों इस मामले को भी प्रमखता से उठाया था।
फेल रहा प्लान तो अब प्रक्रिया बदली
सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को ग़ॉल्डन ऑवर्स में अस्पताल पहुंचाकर उसकी जान बचाने की कोशिश करने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत घायल को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को भले आदमी का दर्जा देकर उसे 5 हजार रुपए और प्रशस्ति पत्र दिया जाता है। लेकिन योजना की प्रक्रिया में कई तरह के पेंच होने के चलते महज 21 लोग ही इसका लाभ ले पाए हैं। इस योजना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने वाले एक से अधिक भले व्यक्ति होते हैं तो प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार राशि समान रुप से विभाजित की जाती है। योजना सफल नहीं होने के बाद अब चिकित्सा विभाग ने योजना के तहत जिला स्तर पर सीएमएचओ कार्यालय, पुलिस और उपखंड अधिकारियों को भी प्रस्ताव भेजने के लिए अधिकृत किया है।
जिले में सीएमएचओ ही सभी प्रस्तावों का भुगतान देकर निस्तारण कर सकेंगे। अधिकारी पूल बजट प्रणाली से भले आदमी को प्रोत्साहन राशि का भुगतान कर सकेंगे।
Published on:
02 Dec 2022 12:33 pm
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