
कोयला संकट के बीच दिल्ली में मंत्रालय अफसरों से मिले CMD
भवनेश गुप्ता
जयपुर। छत्तीसगढ़ में आवंटित कोयला खदान से खनन की अनुमति अटकने से परेशान बिजली कंपनियों के अफसर दिल्ली पहुंचे। राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक आर.के शर्मा, अतिरिक्त मुख्य अभियंता (फ्यूल) देवेन्द्र श्रृंगी ने गुरुवार को दिल्ली में विद्युत मंत्रालय, कोयला मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अफसरों से मुलाकात की।
तीनों मंत्रालय में छत्तीसगढ़ के सरगुजा स्थित परसा कोल ब्लॉक से 5 एमटीपीए और पारसा ईस्ट एवं कांता बासन कॉल ब्लॉक से 15 एमटीपीए खनन की स्वीकृति जल्द देने की जरूरत जताई गई। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और कोयला मंत्रालय के अफसरों को छत्तीसगढ़ सरकार से हस्तक्षेप करने के लिए कहा, जिससे जल्द खनन शुरू किया जा सके। साथ ही साफ कर दिया कि मौजूदा खदान में करीब एक माह का ही कोयला बचा है। ऐसे में कोयला मंत्रालय को भी अतिरिक्त कोयला रैक की वैकल्पिक व्यवस्था रखने की जरूरत जताई।
कमेटी की बैठक
दिल्ली में फोरेस्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक भी हुई, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय स्तर पर लंबित खनन स्वीकृति प्रक्रिया का प्रस्ताव भी शामिल किया गया।
यहां अटका मामला
1. छत्तीसगढ़ में यह अटका— छत्तीसगढ़ के परसा कोल ब्लॉक में 5 एमटीपीए क्षमता का कोल ब्लॉक आवंटित है। इसमें 841 हैक्टेयर जमीन वन भूमि है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इसकी स्वीकृति दे दी है। अब छत्तीसगढ़ सरकार को अंतिम स्वीकृति देनी है। इसकी स्वीकृति मिलने पर राजस्थान को कोयले की 3 रैक (12 हजार टन) अतिरिक्त मिल सकेगी।
2. केन्द्र सरकार में यहां अटका— कोयला मंत्रालय की ओर से उत्पादन निगम को कोल ब्लॉक (क्षमता 10 एमटीपीए) वर्ष 2007 में आवंटन हुआ। वर्ष 2018 में कोल ब्लॉक की क्षमता 10 से बढ़ाकर 15 एमटीपीए कर दी गई। उससे सटी जमीन पर खनन से जुड़ी स्वीकृति प्रक्रिया पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मिलनी है।
Published on:
23 Dec 2021 10:41 pm
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