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कर्नल टॉड ने  उदयपुर में लिखा था इतिहास

इतिहास में अहम जगह रखने वाले मेवाड़ का रिश्ता इतिहास लेखन से भी खास रहा है। अंग्रेजों के पॉलीटिकल एजेंट और इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान का इतिहास लेखन की शुरुआत उदयपुर में की। उनका लिखा इतिहास आखिर लंदन में छपा।

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Madhulika Singh

Mar 12, 2016

इतिहास में अहम जगह रखने वाले मेवाड़ का रिश्ता इतिहास लेखन से भी खास रहा है। अंग्रेजों के पॉलीटिकल एजेंट और इतिहासकार कर्नल जेम्स टॉड ने राजस्थान का इतिहास लेखन की शुरुआत उदयपुर में की। उनका लिखा इतिहास आखिर लंदन में छपा।

कर्नल टॉड ने डबोक स्थित जिस भवन में रहकर इतिहास लेखन की शुरुआत की, आज भी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के पास सुरक्षित है। डबोक स्थित जिस भवन में कर्नल टॉड चार साल (1818 से 1822 ) रहे, उसे कर्नल टॉड भवन के नाम से ही जाना जाता है।

इसी भवन में कर्नल टॉड ने राजपूताना के दस्तावेज जुटाए थे। इतिहास सामग्री को कर्नल टॉड इंग्लैंड ले गए। वहां 1829 में एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थानÓ का प्रकाशन किया। इसमें ही पहली बार राजपूताना के लिए राजस्थान शब्द का इस्तेमाल किया गया। इतिहासकार प्रो. एसके गुप्ता बताते हैं कि कर्नल टॉड ने उदयपुर प्रवास के दौरान डबोक स्थित भवन में राजस्थान के इतिहास संबंधी ताम्रपत्र, शिलालेख, पांडुलिपियां जमा की।

समुद्र में डाले कई साक्ष्य
इतिहासकार डॉ. जीएन माथुर ने बताया कि कर्नल टॉड 1822- 23 में उदयपुर से इंगलैंड गए। उनके आधार मानते हुए लिखी कई किताबों में बताया गया कि डबोक में जुटाई सामग्री गुजरात से समुद्र मार्ग से इंगलैंड ले जाया गया। इसमें वजनी शिलालेख, ताम्रपत्र, पांडुलिपियां भी थीं। जहाज में क्षमता से अधिक वजन होने और बीच राह में मुश्किल आने पर टॉड ने काफी सामग्री समुद्र में डलवा दी।
लंदन में सुरक्षित हमारी धरोहर
इतिहासकार डॉ. चंद्रशेखर शर्मा बताते हैं कि लंदन की रॉयल एशियाटिक सोसायटी यहां से ले जाई गई वस्तुओं से आबाद है। कर्नल टॉड ने राजस्थान से ले जाई गई वस्तुओं को वहां संग्रहित कराया। कई इतिहासकार लंदन जाकर इनका अध्ययन कर चुके हैं।

कर्नल टॉड भवन को संग्रहालय के रूप में विकसित करेंगे। इतिहास के नायकों की प्रतिमाएं लगाएंगे। इससे इतिहास पर शोध करने वाले विद्यार्थियों को भी मदद मिलेगी।
प्रो. एसएस सारंगदेवोत, कुलपति, विद्यापीठ विवि