
भवानीमंडी (झालावाड़)/पत्रिका न्यूज नेटवर्क. कस्बे व ग्रामीण क्षेत्र में रंगीन चिप्स, पापड़ (कचरी) का बाजार सजने लगा है। घरों में अब इसका चलन आम हो गया है। यह विशेष कर छोटे बच्चों और शादी समारोह में खासी पसंद आ रही है, लेकिन रंगीन चिप्स पापड़ को लेकर सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है। इसकी वजह रंगीन चिप्स में प्रयोग हो रहा रंग है। जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। चिकित्सक इसे सेहत के लिए नुकसानदायक बता रहे हैं। कस्बे में चिप्स, पापड़ की दुकानों पर अब हरे, पीले, लाल आदि रंगों में रंगी कचरी भी दिखने लगी हैं। इस की एक नहीं दर्जनों तरह के अलग-अलग रूप में बेची जा रही है।
इनको बनाने वाली कंपनियां स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक रंगों का इस्तेमाल करने से नहीं चूक रही हैं। अब होली से पहले बाजार में आ रहे रंगीन कचरी, चिप्स, गोलगप्पे, पापड़ आदि की मांग तेजी से बढ़ रही है। ये चमकदार और रंगीन चिप्स व पापड़ स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल सकते हैं। खाद्य सामानों में मिलावट का खेल जोरों पर चल रहा है। लोग तीज-त्योहार पर पहले घरों पर खाद्य सामग्री तैयार करते थे, लेकिन अब समय के साथ व्यक्ति पूरी तरह से बाजार पर निर्भर हो गया।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक:
कंपनियों में इसका जमकर फायदा उठा रही हैं। वह बाजार में रेडीमेड तैयार की हुई खाद्य सामग्री खपा रही हैं। वहीं, इनकी आड़ में खाद्य सामग्रियों पर वस्तु निर्माण की तिथि, एक्सपायर तिथि इत्यादि तक अंकित नहीं होती है। ऐसें में खरीदार को पता ही नहीं चल पाता है कि खाद्य सामग्री का निर्माण कब हुआ। ऐसी खाद्य सामग्री लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रही है। अखाद्य रंग केमिकल से तैयार होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं। अस्थमा, किडनी, लीवर, आंत और फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं। इनके सेवन से डायरिया सहित गर्भवती महिलाओं को गर्भपात की भी समस्या हो सकती हैं। एसीडिटी की शिकायत भी बढ़ जाती है। पेट रोग संबधी समस्या आने पर कही तरह की बीमारियों से बच्चा ग्रस्ति हो जाता है।
इनका कहना है...
आजकल बच्चे खाना खाने से ज्यादा फास्ट फूड खाना अधिक पंसद कर रहे हैं। बच्चों को दाल-हरी सब्जी का जितना ज्यादा हो खिलाना चाहिए।
—डॉ.रवि काबरा, फिजिशियन, सीएचसी भवानीमंडी
खाद्य सामग्री जांच के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बाजार में बिक रही रंगीन चिप्स व पापड़ समेत अन्य खाद्य सामग्री पर विभाग की नजर है। अगर कहीं भी सिन्थेटिक कलर के पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
—अरुण सक्सेना, खाद्य सुरक्षा अधिकारी, झालावाड़
Published on:
26 Feb 2023 01:09 pm
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