
भारत का उच्चतम न्यायालय
मैंने सुप्रीम कोर्ट में 37 साल तक प्रैक्टिस की है, लेकिन कभी भी एक साथ तीन संविधान पीठ को बैठते नहीं देखा। जब मैं भारत का प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) बना, एक दिन ऐसा भी आया जब एक साथ तीन-तीन संविधान पीठ ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग भी शुरू की गई। इसलिए बड़ी कामयाबी हासिल करने की संतुष्टि के साथ मैं विदा हो रहा हूं।’ प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित सोमवार को अपने आखिरी कार्य दिवस पर परंपरा के अनुसार बैठी विशेष पीठ में अपनी भावनाओं को व्यक्त कर रहे थे।
परंपरा के अनुसार, सीजेआइ ललित के साथ नवनियुक्त प्रधान न्याधीश डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी भी साथ-साथ बैठे। जस्टिस त्रिवेदी सीजेआइ ललित के नेतृत्व में बैठी आखिरी खंडपीठ का हिस्सा थीं। सीजेआइ ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि सुप्रीम कोर्ट के प्रत्येक जज को संविधान पीठ का हिस्सा बनने का मौका मिल सके। उन्होंने कहा कि ‘मैं मानता हूं कि सुप्रीम कोर्ट का प्रत्येक न्यायाधीश किसी भी मामले की सुनवाई में सक्षम है। इसलिए वह संविधान पीठ का हिस्सा हो सकता है।
49वें सीजेआइ के रूप में मात्र 74 दिन के कार्यकाल का जिक्र करते हुए जस्टिस ललित ने कहा कि मैंने जो टास्क तय किए थे, उसे पूरा करने का अहसास हो रहा है। इस पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि आपने जो सुधार किए हैं, वे समय के साथ खरे उतरेंगे। उन्होंने वादा किया जस्टिस ललित की सुधारात्मक पहल आगे भी जारी रहेगी। बार के सदस्यों ने भी जस्टिस ललित के प्रयासों की सराहना की।
सीजेआइ चंद्रचूड़ से सीजेआइ चंद्रचूड़ तक
सीजेआइ ने सुप्रीम कोर्ट में शुरूआती दिनों को याद करते हुए बताया कि कैसे उस समय मामलों को सूचीबद्ध करने के लिए सीजेआइ के समक्ष पेश किया जाता था। ’मैं मुंबई से आया था। मैंने भी एक मामला तत्कालीन सीजेआइ के समक्ष रखा था। वह कोई और नहीं बल्कि जस्टिस वाइवी चंद्रचूड़ थे। जस्टिस वाइवी चंद्रचूड़ की मशाल कई सीजेआइ से होते हुए मुझ तक पहुंची। अब मुझे इस मशाल को उनके ही पुत्र को सौंपने का सौभाग्य मिल रहा है।’ उन्होंने कहा कि इससे अच्छा क्या हो सकता है।
Published on:
08 Nov 2022 05:14 pm
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