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सरकार की सराहना के बाद भी नहीं हुआ स्मार्ट शौचालयों का निर्माण

स्वायत्त शासन विभाग ने जारी किए निर्देश

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rajasthan news

जयपुर. आधुनिक सुविधा युक्त शौचालय के निर्माण के लिए नगरीय निकाय गंभीर नहीं दिखाई दे रहा हैं। मुख्मयंत्री की ओर से इसे सहराना मिलने के बावजूद भी निकायों द्वारा अभी तक इनकी डिजाइन तैयार नहीं कराई गई है। स्वायत्त शासन विभाग ने इस मामले पर गंभीरता जताते हुए जयपुर नगर निगम सहित 7 निकायों को आड़े हाथ लिया है। विभाग के निदेशक पवन अरोड़ा ने मंगलवार को जयपुर, जोधपुर , उदयपुर , बीकानेर , कोटा , अजमेर , भरतपुर निकाय को पत्र निर्देश जारी कर तत्काल काम शुरू करने के लिए कहा है। इसके लिए अल्पकालीन निविदा आमंत्रित की जाएगी।

मुख्यमंत्री का दिया हवाला

- आधुनिक शौचालय का निर्माण कराने के लिए डिजाइन सलाहकार फर्म की ओर से जवाहर कला केन्द्र में प्रदर्शनी लगाई गई थी। मुख्यमंत्री ने इसकी काफी सहराना की।

-इस डिजाइन की तर्ज पर पहले चरण में नगर निगमों में सलाहकार फर्म की सेवा लेने के निर्देश दिए गए।

- इसके जरिए आधुनिक सुविधा युक्त शौचालय की डिजाइन तैयार कराना था, जो की अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। महत्वपूर्ण काम होने के बावजूद भी इस कार्य को नज़रअंदाज़ कर देना सही नहीं है ।
(स्वायत्त शासन विभाग के पत्र में अंकित)

हर निगम में 10 शौचालय

विभाग द्वारा हर निगम में 10 आधुनिक शौचालय निर्माण की स्वीकृति जारी की गई है। इसमें से 6 शौचालय का निर्माण संबंधित निगम स्तर पर जारी निविदा दस्तावेज के अनुसार कराना होगा।
प्रमुख चिन्हित स्थानों पर 4 शौचालय निर्माण कराने के लिए दोबारा अल्पकालीन निविदा आमंत्रित करनी होगी।

मनरेगा में प्रदेश को मिलेंगे बकाया 645 करोड़

जयपुर. मनरेगा के तहत प्रदेश को वित्तीय वर्ष २०१७-१८ की बकाया ६४५ करोड़ रुपए की राशि केन्द्र सरकार १० अप्रेल तक जारी कर देगी। नई दिल्ली में केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेन्द्र तोमर और प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री राजेन्द्र राठौड़ की मुलाकात के दौरान इस पर सहमति बनी है। राठौड़ ने तोमर को बताया कि बीते वित्तीय वर्ष में केन्द्र से मनरेगा के तहत कम राशि प्राप्त होन के कारण श्रम मद की तुलना में सामग्री मद पर ३२.५७ प्रतिशत ही व्यय किया जा सका। जबकि एक वित्तीय वर्ष में श्रम और सामग्री भुगतान में 60:40 का अनुपात होना जरूरी है। अगर केन्द्र बकाया ६४५ करोड़ रुपए की राशि इस वित्तीय वर्ष के पेटे देता है तो मौजूदा वर्ष में भी श्रम सामग्री अनुपात बिगड़ जाएगा। एेसे में बकाया राशि पिछले वित्तीय वर्ष के पेटे ही दी जानी चाहिए। इस पर तोमर ने सहमति जताते हुए १० अप्रेल तक राशि जारी करने का आश्वासन दिया।