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क्या बर्खास्त MLA कंवरलाल मीणा को मिलेगी माफी? इस पत्र से मचा बवाल, जूली बोले- BJP का असली चेहरा बेनकाब

Rajasthan Politics: बारां जिले की अंता सीट से बर्खास्त भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की दया याचिका को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है।

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Kanwarlal Meena and Tikaram Jully

कंवरलाल मीणा और टीकाराम जूली (पत्रिका फाइल फोटो)

Rajasthan Politics: बारां जिले की अंता सीट से बर्खास्त भाजपा विधायक कंवरलाल मीणा की दया याचिका को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है। कंवरलाल मीणा को झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र में वर्ष 2005 में तत्कालीन एसडीएम पर पिस्तौल तानने और एक प्रशासनिक अधिकारी का कैमरा छीनकर तोड़ने के मामले में कोर्ट द्वारा तीन साल की सजा सुनाई गई थी। अब उनकी दया याचिका राज्यपाल के समक्ष लंबित है।

इस संबंध में झालावाड़ पुलिस अधीक्षक ने अकलेरा और मनोहर थाना पुलिस से राय मांगी है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से थानों को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।

पुनर्विचार याचिका पेश करने की तैयारी

उधर, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका पेश करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। सजा पर सुप्रीम कोर्ट तक से राहत नहीं मिलने और सरेंडर करने के लिए तय समयसीमा पूरी हो जाने पर कंवरलाल ने मई 2025 में सरेंडर कर दिया। इसके बाद 23 मई को विधानसभा ने सदस्यता समाप्त कर निर्वाचन आयोग को सूचना भिजवाई। जेल में तबीयत खराब होने के कारण कंवरलाल वर्तमान में अस्पताल में भर्ती है। इसी दौरान राज्यपाल को दया याचिका पेश की गई है, जिस पर झालावाड़ पुलिस से रिपोर्ट मांगी गई है।

BJP का असली चेहरा बेनकाब- जूली

नेता विपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर हमला बोला है। जूली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लेटर शेयर करते हुए कहा कि भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ दिनों से लोकतंत्र के रक्षक बनने का ढोंग कर रही भाजपा का असली चेहरा बेनकाब हो गया है।

टीकाराम जूली ने कहा कि SDM अधिकारी पर पिस्तौल तानने के मामले में सजायाफ्ता बर्खास्त भाजपा विधायक कंवर लाल मीणा की राज्यपाल के माध्यम से सजा माफी का रास्ता बनाया जा रहा है। क्या किसी आम आदमी की भी इस प्रकार सजा माफी की जाती है या यह विशेषाधिकार केवल भाजपा के लोगों के लिए ही है। अदालत से सजा प्राप्त बर्खास्त विधायक के लिए ऐसी प्रक्रिया शुरू करना लोकतंत्र की हत्या के समान है।

जूली ने कहा कि पहले इनकी सदस्यता रद्द करने में अनावश्यक देरी की एवं अब सजा माफी की कार्रवाई शुरू, यह दिखाता है कि भाजपा का अब लोकतंत्र और संविधान में कोई भरोसा नहीं रह गया है और वह एक देश में दो विधान चलाना चाह रही है जिसमें एक विधान भाजपाइयों के लिए और दूसरा आम जनता के लिए है।

क्या था पूरा मामला?

गौरतलब है कि 3 फरवरी 2005 को झालावाड़ के मनोहर थाना क्षेत्र के दांगीपुरा-राजगढ़ मोड़ पर ग्रामीणों ने खाताखेड़ी उपसरपंच चुनाव में धांधली का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर दी थी। तत्कालीन एसडीएम रामनिवास मेहता, प्रोबेशनर आईएएस डॉ. प्रीतम बी. यशवंत और तहसीलदार रामकुमार मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाने का प्रयास किया।

इसी दौरान कंवरलाल मीणा अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और एसडीएम मेहता की कनपटी पर पिस्तौल तानकर दो मिनट में दोबारा मतगणना की घोषणा करने की धमकी दी। विरोध के बाद उन्होंने सरकारी वीडियोग्राफर की कैसेट तोड़ दी और प्रोबेशनर अधिकारी का डिजिटल कैमरा छीन लिया।

ट्रायल कोर्ट ने कंवरलाल को तीन साल की सजा सुनाई, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर की। इस याचिका पर अब पुलिस से राय मांगी गई है, जिसके बाद सियासी हलचल तेज हो गई है।

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