
Rajasthan News: 10वीं और 12वीं बोर्ड के छात्रों के सत्रांक भेजने के मामले में सरकारी स्कूलों पर की गई सख्ती का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों पर सख्ती का आदेश निकाला है, जबकि निजी स्कूलों पर आदेश लागू नहीं है। शिक्षकों ने विरोध कर कहा कि सालभर तक छात्रों के लिए विषय अध्यापकों की व्यवस्था नहीं की गई। लेकिन, अब सत्र के आखिरी में विभाग ने पढ़ाई की सुध ली है।
राजस्थान शिक्षा विभाग ने आदेश जारी किए हैं कि सत्रांक और मुख्य परीक्षा के अंकों में 50 फीसदी या इससे अधिक का अंतर पाया गया तो सत्रांक संदिग्ध माने जाएंगे। संस्था प्रधान को कारण स्पष्ट करना होगा। कारण सही नहीं पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई होगी।
--संस्था प्रधानों को हर विषय की दो प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
--तीन साल तक अर्द्धवार्षिक और परख (टेस्ट) की कॉपियों को सुरक्षित रखा जाना अनिवार्य होगा।
--बाहरी शिक्षक की मौजूदगी में विषय अध्यापक परख, अर्द्धवार्षिक के अंकाें और बोर्ड में भेजे जाने वाले अंकों का मिलान करना होगा।
ऐसे भेजे जाते हैं 20 फीसदी सत्रांक
--10 फीसदी अंक स्कूल स्तर पर होने वाले तीनों परख और अर्द्धवार्षिक के अंकाें के आधार पर।
--5 फीसदी अंक प्रोजेक्ट कार्य के होते हैं।
-- 3 फीसदी अंक छात्र की उपस्थिति के होते हैं।
--2 फीसदी अंक छात्र के व्यवहार और अनुशासन के होते हैं।
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इनका कहना
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने कहा कि कक्षा 10वीं, 12वीं के अधिकांश छात्रों को वर्षभर विषय अध्यापक नहीं मिले। शिक्षकों के गैर शैक्षणिक कार्यों के कारण कक्षा में समयबद्ध नहीं जा पाए। ऐसे में सत्रांक संबंधी जारी परिपत्र न्यायोचित नहीं है।
अरस्तु के प्रदेश अध्यक्ष रामकृष्ण अग्रवाल का कहना है कि यह एक तरफा आदेश है। निजी स्कूलों को फायदा पहुंचाकर सरकारी स्कूलों को भय दिखाया जा रहा है। निजी स्कूलों पर सख्ती की जरूरत है। सत्रांक पर कैंची चलाने से सरकारी स्कूलों के बोर्ड का परिणाम कम रहेगा। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष मोदी का कहना है कि अभी आदेश सरकारी स्कूलों के लिए है, निजी स्कूलों के लिए भी जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे।
Published on:
23 Feb 2024 10:20 am
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