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कुन्नूर- सैलानियों की दिल मोह लेती है यहां की खूबसूरती, एक बार जरूर बिताएं यहां अपनी छुट्टियां

दक्षिण भारत के तमिल नाडु राज्य की नीलगिर पर्वतमाला पर बसा 'कुन्नूर' दुनियाभर में अपनी अनोखी खूबसूरती के लिए मशहूर

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Yuvraj Singh Jadon

Aug 09, 2017

दक्षिण भारत के तमिल नाडु राज्य की नीलगिर पर्वतमाला पर बसा 'कुन्नूर' दुनियाभर में अपनी अनोखी खूबसूरती के लिए मशहूर है। कुन्नूर नीलगिरी पर्वतमाला का ऊटी के बाद दूसरा सबसे बड़ा पर्वतीय स्थल है। यह नीलगिरी पर्वतमाला को जाने वाले ट्रैकिंग अभियानों के लिए एक आदर्श स्थल माना जाता है।

मनमोह लेते हैं चाय के बागान
कुन्नूर में लहलहाते चाय के बागान बरबस ही सैलानियों का मनमोह लेते हैं। निजी चाय बागानों द्वारा पहाड़ियों पर बड़े पैमाने पर की गयी खेती से चारों ओर ताजा हरी चाय की पत्तियां छा गयी हैं, जिन्हें तोड़कर स्थानीय कारखानों में ले जाकर विभिन्न प्रक्रियाओं के बाद पैक करके बिक्री के लिए कुन्नूर, कोयंबटूर और कोचीन के नीलाम घरों में ले जाया जाता है।

कुन्नूर को और भी खास बनाते हैं ये पर्यटन स्थल

सिम का पार्क
कुन्नूर में घूमने के लिए सिमस् एक महत्वपूर्ण जगह है। 12 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस उद्यान में पौधों की 1000 से अधिक प्रजातियों का संग्रह है, जिसमें मैग्नोलिया, पाइंस, पेड़ फर्न और कैमेलिया भी शामिल है। वनस्पति उद्यान को आंशिक रूप से जापानी शैली में विकसित किया गया है और इसका नाम 1874 में मद्रास क्लब के सचिव जे. डी. सिम के नाम पर रखा गया है। यहां का मुख्य आकर्षण मई में आयोजित होने वाली वार्षिक फल और सब्जी प्रदर्शनी है।

ट्रैकिंग ट्रेल
यहां शहर से बाहर निकलने के लिए ट्रैकिंग ट्रेल्स भी हैं। एक लोकप्रिय ट्रैकिंग ट्रेल पर्यटकों को लैम्ब्स रॉक तक ले जाता है जो कुन्नूर से 9 किलोमीटर दूर है। लैम्ब्स रॉक कोयंबटूर के मैदानों के ऊपर से चाय और कॉफी के बागानों का एक शानदार नजारा दिखाता है। लैम्ब्स रॉक से थोड़ा आगे लेडी कैनिंग की सीट है जहां से नीलगिरी का विहंगम दृश्य नजर आता है।

डॉल्फिन सीट ट्रैक
पर्यटक लेडी कैनिंग की सीट से डॉल्फिन सीट तक ट्रैक कर सकते हैं, जो कुन्नूर से 12 किलोमीटर दूर है। पास ही लॉज फॉल्स है जो कुन्नूर से 5 किलोमीटर की दूरी पर है। फॉल्स से दरुग तक ट्रैक करना संभव है जो कुन्नूर से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दरुग को पक्कासूरन कोट्टई भी कहते हैं। दरुग में 16 वीं सदी के एक किले के ध्वंसावशेषों को देखा जा सकता है। किला 750 मी. की ऊंचाई पर स्थित है।

IMAGE CREDIT: traking tale

पोमोलोजीकल (फलकृषि-विज्ञान) स्टेशन

यह संस्थान तेंदू, अनार और खूबानी के लिए राज्य कृषि विभाग का एक अनुसंधान केन्द्र है।

डॉल्फिन्स नोज व्यूप्वायंट

डॉल्फिन्स नोज व्यूप्वायंट कुन्नूर से 10 किलोमीटर की दूरी पर है। यह केवल नीलगिरी पहाड़ियों के विशाल प्रसार का ही नहीं बल्कि कैथरीन फॉल्स का भी एक विहंगम दृश्य प्रदान करता है।

लैम्ब्स रॉक

डॉल्फिन्स नोज के रस्ते में कुन्नूर से लगभग 5½ किमी की दूरी पर शानदार परिदृश्य तथा चाय और कॉफी के बागानों को देखने का एक और सुविधाजनक स्थान लैम्ब्स रॉक पड़ता है।

दरुग

कुन्नूर से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दरुग एक किले के ध्वंसावशेषों के साथ अतीत में ले जाता है, टीपू सुल्तान ने 16वीं शताब्दी में कभी इस किले का प्रयोग किया था।

लॉज फॉल्स

यह राजसी झरना कुन्नूर से 5 किलोमीटर दूर मेट्टूपलयम के रास्ते में पड़ता है।

ऊटी

ऊटी के पहाड़ी स्थल को पहाड़ी स्थलों (हिल स्टेशनों) की रानी के रूप में भी जाना जाता है, यह कुन्नूर के पश्चिमोत्तर में 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ऊटी एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। कुन्नूर की तरह ऊटी भी नीलगिरी पहाड़ियों की हरियाली में बसा है और यहां कई झीलें, उद्यान और औपनिवेशिक स्थापत्य कला की विशेषता युक्त इमारतें हैं।

कटारी फॉल्स

आकर्षण की मुख्य जगह विद्युत स्टेशन है जो सेल्स के निकट 1000 किलो वाट के आस-पास बिजली की आपूर्ति करता है।

पेस्टर संस्थान:

पर्यटकों को इस संस्थान को देखने के लिए के लिए एक विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है। यह संस्थान सिमस् के पास स्थित है। यह 1907 में शुरू किया गया था। यह संस्थान रेबीज (कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी) और ट्रिपल वैक्सीन (डीपीटी, डीटी और टीटी) के लिए टीके विकसित करता है। प्रारंभिक दिनों में यह इन्फ्लुएंजा के टीके के अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। अब यह ऊतक संवर्धन रेबीज प्रतिरोधक टीके (TCARV) और डीपीटी समूह के टीकों का उत्पादन करता है।

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